Wednesday, 17 May 2017

Eyes Care-सुन्दर स्वस्थ आंखें कैसे पाएँ

आँखें ( eyes ) हमारे चेहरे की आत्मा है। ये सिर्फ देखने भर के लिए नहीं है। आँखों से दिल , दिमाग , शरीर सब कुछ जुडा होता है और आँखें
इनका हाल अच्छे से बयां कर देती है। दिल की भावनाएं आँखों के आंसू से अच्छा कौन बता सकता है। ख़ुशी , गम , डर ,आश्चर्य ,
शक , आदि भावनाएं आँखें ( eyes ) दर्शा देती है। आँखों से दिल में उतरना सभी ने सुना होगा और ये सच भी है। ये हमारे आत्म विश्वास का
आइना है। आँखों ( eyes ) से चेहरे की सुंदरता पर बहुत फर्क पड़ता है। सुंदर आँखे मन मोह लेती है।
यदि आँखों की देखभाल सही तरीके से की जाये तो ये उम्र भर साथ देती है।आपका चेहरा आत्म विश्वास और स्वास्थ्य से भरा नजर आता है।

इसके लिए थोड़ा समय आँखों ( eye ) की देखभाल को जरूर देना चाहिए ताकि उम्र भर इनका आनंद उठा सके।

आँखों का ध्यान रखने के उपाय – Treatment associated with Eye
कृपया ध्यान दें: किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लिक करके उसके बारे में विस्तार से जानें।

— आँखें बहुत कोमल होती है इन्हे तेज धूप, धूल – मिट्टी, धुआं आदि से बचाना चाहिए। धूप में अल्ट्रा वॉयलेट किरणे आँखों ( eye ) के लिए

बहुत नुकसान देह होती है। इसके लिए अच्छी क़्वालिटी के गॉगल्स पहन कर बचाव किया जा सकता है।
— पौष्टिक और विटामिन ” The ” से भरपूर चीजें खानी चाहिए। जैसे गाजर, शकरकंद, काशीफल (pumpkin ) आम, पपीता, आदि।

— आँखों को दिन में चार पांच बार ठन्डे पानी से छींटे मारकर धोना चाहिए।

— लेट कर बुक्स या मोबाइल पर पढ़ाई नहीं करनी चाहिए । पढ़ने के लिए आँखों ( eye ) से किताब या स्क्रीन की दूरी डेढ़ से दो फुट की

होनी चाहिए।

— अाँखे झपकाना कम नहीं होना चाहिए अन्यथा सूखापन होकर आँखों में जलन हो सकती है।

— लगातार घंटो तक आँखों के उपयोग से थकान हो जाती है। इन्हे बीच में रेस्ट जरूर देना चाहिए।

— शहद आँखों के लिए बहुत अच्छा होता है। शुद्ध शहद सलाई से सप्ताह में दो बार लगाने से आँखें स्वस्थ रहती है। या एक एक बूँद शहद

आँखों में डालें। शहद शुद्ध व स्वच्छ होना जरुरी है।

— बादाम, सौंफ और कुंजा मिश्री बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। इस मिश्रण को एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को दूध के साथ

लें। ये आँखों के लिए अमृत है। लगातार एक महीने लेने से शुरुआती कम नंबर का चश्मा भी उतर जाता है।
— गाजर का जूस आँखों ( eye ) के लिए अच्छा होता है। सीजन में अवश्य पीना चाहिए।

— अाँखों के नीचे काले घेरे हो तो ककड़ी का रस तीन चार बार लगाना चाहिए और ककड़ी रोज खानी चाहिए। रस आँखों में नहीं जाना

चाहिए।

— आँखों की एक्सरसाइज करनी चाहिए ताकि आँखें स्वस्थ रहें।
— आँख में गुहेरी ( attention sty ) हो गई हो तो उसका उपचार करना चाहिए।

आँखों की 7 बेहतरीन एक्सर साइज

आँखों की एक्सरसाइज ( ankho ki physical exercise ) करने पर लोग ध्यान नहीं देते जबकि यह बहुत आवश्यक है। आँखों की परेशानी का

सबसे बड़ा कारण आँखों की बाहरी पेशियों पर तनाव पड़ना होता है। इस तनाव को कम करने के लिए आँखों की एक्सरसाइज

( ankho ki physical exercise ) की जाती है । नियमित रूप से आंखों की एक्सरसाइज ( eye physical exercise ) करने से आँखों की मांसपेशियां और

आँखों के स्नायु तंत्र मजबूत होकर आँखों को लम्बे समय तक काम करने लायक बनाया जा सकता है। साथ ही आँखें सुन्दर व स्वस्थ बनी रहती

है। ये बहुत ही आसान है सीखिए आँखों की एक्सरसाइज कैसे करें।

आँखों की एक्सरसाइज करने का तरीका – Eye Physical exercise
— सीधे खड़े हों जाएँ। गर्दन को स्थिर रखते हुए आँखों की पुतली को धीरे धीरे दाएं ले जायें जितना ज्यादा ले जा सकते हो फिर धीरे धीरे

बाएं ले जाये फिर दाएं इस तरह से चार बार पुतली को दाएं और बाएं घुमाएँ । आँखें बंद करके दो मिनट विश्राम लें।.
— गर्दन को स्थिर रखते हुए पुतलियों को धीरे धीरे ऊपर ले जाएँ छत की तरफ देखें फिर धीरे धीरे नीचे ले जाएँ फर्श की तरफ देखें

फिर ऊपर ले जाएँ इस तरह चार बार ऊपर नीचे चलाएं । आँखें बंद करके दो मिनट विश्राम लें।
— गर्दन को स्थिर रखते हुए पुतलियों को ऊपर ले जाएँ फिर दायीं तरफ गोलाकार घुमाते हुए एक सर्कल बनायें फिर बाईं और घूमते

हुए एक सर्कल बनायें इस तरह दोनों तरफ चार बार घुमाएँ। आँखें बंद करके दो मिनट विश्राम लें।

— हथेलियों से आँखों को दो मिनट इस प्रकार ढक दें की जरा भी रौशनी आँखों तक नहीं पहुंचे। आँखों पर दबाव बिल्कुल नहीं पड़ना

चाहिए। आँखों और दिमाग को ढ़ीला छोड़ दें। पूरा विश्राम करें। इसे पामिंग कहते है। दिन में तीन चार बार पामिंग करें।

— अंगूठे को अपने सामने लगभग 10 इंच की दूरी पर सीधा रखें। अंगूठे के ऊपरी हिस्से पर देखें। अब अंगूठे के पीछे पंद्रह बीस फुट

दूर स्थित किसी भी चीज को देखें। वापस अंगूठे को देखें। इस तरह आठ दस बार नजर पास और दूर केंद्रित करें। पामिंग करके इसे

फिर दोहराएँ ।

— काम करते समय बीच में रुक कर दस बार पलकों को जल्दी जल्दी झपकाएं। इससे थकान मिटेगी। आँखे गीली और चमकदार बनी रहेगी।

— हँसे और मुस्कराएँ। इससे आँखों में एक विशेष मुग्ध कर देने वाली चमक पैदा होती है।.

आँख की फुंसी गुहेरी का उपचार

आँख की फुंसी जिसे अंग्रेजी में Attention Sty कहते है, आँख की पलकों पर बाहर की तरफ या अंदर की तरफ हो जाती है । ज्यादातर यह फुंसी

बाहर की तरफ होती है। आम बोलचाल में इसे गुहेरी कहते है। इसे आँख में बिलनी ( aankh me personally Bilni ) के नाम से भी जाना जाता है।

इस फुंसी में दर्द होता है, सूजन होती है। पलक झपकाना मुश्किल हो जाता है। कई बार इससे आँख में खुजली या जलन भी होती है। रौशनी

से थोड़ी परेशानी होने लगती है। फुंसी के बीच पीले रंग में पस भी नजर आ सकता है। फुंसी से कुछ पानी भी निकल सकता है।.
आँख की पलक में छोटी छोटी तेल ग्रंथियां होती है। यह ग्रंथियां डेड स्किन, धूल मिट्टी, या काजल आदि के कारण बंद हो जाती है। इसके

कारण वहाँ बेक्टिरिया पैदा हो जाते है। इस वजह से सूजन होने लगती है। यह एक फुंसी का रूप ले लेती है। यही आंख की गुहेरी होती है।

साधारणतया सात आठ दिनों में ये ठीक हो जाती है। ये बढ़े नहीं इसका ध्यान रखना चाहिए।

हार्मोन के बदलाव, तनाव और साफ सफाई का ध्यान नहीं रखने के कारण भी आँख में फुंसी हो सकती है। एक बार में एक या एक से अधिक

फुंसी भी ही सकती है।.
आँख की फुंसी गुहेरी का घरेलु इलाज – Gharelu Nuskhe with regard to Attention Sty
aankh me personally phunsi theek kaise kare, aankh ki bilani, aankh me personally bilauni

— गर्म पानी में साफ सूती कपड़े को भिगोकर नीचो लें। इससे गुहेरी की सिकाई करें। दिन में तीन चार बार इस प्रकार सिकाई करने से

बहुत आराम मिलता है। सुजन और दर्द कम हो जाते है।

— इमली के बीज की गिरी को चंदन की तरह घिस कर गुहेरी ( attention sty ) पर लगाएं। आश्चर्य जनक फायदा होगा। इमली के बीज को दो

दिन तक पानी में भिगोकर छिल्का निकाल देना चाहिए । फिर काम में लेना चाहिये। इससे आँख की फुंसी ( aankh ki funsi ) ठीक

हो जाती है।
— सीधे हाथ की तर्जनी अंगुली बाईं हथेली पर तेजी से घिसें । गर्म होने पर अंगुली फुंसी पर रखें। यह क्रिया बार बार ( 15 -20 बार ) करने

से आँख में फुंसी ठीक हो जाती है। दिन में चार पांच बार इसे करें।

— गर्म पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर इस पानी से कपड़े की मदद से सिकाई करने से आँख फुंसी ठीक होती है।
— ग्वारपाठे ( Aloe Observara ) का गूदा फुंसी पर दिन में तीन चार बार लगाने से गुहेरी का दर्द व सूजन मिटकर गुहेरी ठीक हो जाती है।

— एक कप पानी में अमरुद के चार पाँच पत्ते डालकर उबाल लें। गुनगुना रहने पर इस पानी में साफ कपड़ा भिगोकर इससे सिकाई करें।

दिन में दो तीन बार इस प्रकार सिकाई करने से आँख की फुंसी ठीक होती है।

— बार बार आँख पर फुंसी हो जाती हो तो त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच सुबह शाम एक सप्ताह तक दूध के साथ लें। आँख पर फुंसी होना बंद

हो जायेगी । त्रिफला चूर्ण की सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लीक करें।

— गुप्तांग की सफाई नहीं करने पर भी आँख पर बार बार फुंसी हो जाती है। अतः गुप्तांग को नहाते वक्त अच्छे से धोकर साफ करना चाहिए।

लिंग के अगले हिस्से शिश्न मुंड Manhood mind की स्किन के नीचे की सफाई विशेष कर जरुरी होती है। गुप्तांग साफ नहीं करने से स्वप्नदोष भी

हो सकता है। तथा शीघ्रपतन की समस्या भी हो सकती है।
— आँख की फुंसी ( attention sty ) को मसलना नहीं चाहिये। फुंसी को फोड़ने या पस निकालने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिये। मसलने या

फोड़ने से इन्फेक्शन होकर समस्या बढ़ सकती है।

— फुंसी ( attention sty ) को आँख के मेकअप जैसे मस्कारा, आई लाइनर, आई शेडो आदि से छुपाने की कोशिश नही करनी चाहिये ।

मेकअप के सामान से इन्फेक्शन बढ़ सकता है। पुराना हो चुका आँख के मेकअप का सामान भूल कर भी काम में ना लें।

— आँख में फुंसी होने पर कांटेक्ट लेंस नहीं पहनने चाहिए। लेंस की बजाय चश्मा काम में लेंना चाहिये । आराम रहेगा।

— तीन महीने से ज्यादा पुराना आँखों के मेकअप का सामान यूज़ नहीं करना चाहिये। ये इन्फेक्शन की वजह बन सकता है।

— मानसिक तनाव गुहेरी का कारण हो सकता है। एग्जाम के समय छात्रों को अकसर ये परेशानी हो जाती है। टेंशन करने के बजाय

अपने दिमाग की ताकत बढ़ाने की कोशिस करनी चाहिए। दिमागी ताकत बढ़ाने के घरेलु नुस्खे के लिए यहाँ क्लीक करें। रिलैक्स होना

सीखें। खुशहाल रहना सीखें।

आँखों के लिए घरेलु नुस्खे

आँखें दिमाग के बाद शरीर की सबसे जटिल संरचना है। आँखों से देखने समझने की प्रक्रिया इतनी जटिल है की दिमाग का लगभग आधा

हिस्सा इसमें जुटा रहता है। आँख का लगभग सिर्फ 15 % हिस्सा हमें दिखाई देता है। बाकि हिस्सा अंदर की तरफ होता है। प्रकृति ने आँखों

की सुरक्षा के लिए पूरी व्यवस्था की है।

पलकें आँख की सुरक्षा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। पलक झपकने में एक सेकंड का भी दसवाँ हिस्सा लगता है। ये शरीर की सबसे फुर्तीली

मांसपेशी है। बरौनियां ( Attention Leshes ) भी आँख की सुरक्षा से जुड़ी है। दुनिया का कोई भी कैमरा कुदरत के इस शानदार कैमरे का

मुकाबला नहीं कर सकता । जो प्रकृति का हर सुन्दर रंग, आकार, बनावट, दूरियां, नजदीकियाँ, गहराइयाँ, भावनाएं आदि हर चीज़ को

हर कोण ( Position ) से हमें दिखाने में सक्षम हैं।

इस खूबसूरत दुनिया को देखने के अलावा आँखों का हमारे चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में भी बड़ा योगदान होता है। जब प्रकृति ने हमे इतना

अनमोल उपहार दिया है तो हमें इसे सहेजना चाहिए और उसका दुरूपयोग नहीं करना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी और देखभाल करके हम

इसका उम्र भर आनंद उठा सकते है।
आजकल कम्प्यूटर और मोबाइल का उपयोग बहुत बढ़ गया है। इसकी वजह से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम नामक बीमारी भी बहुत बढ़ गई है।

इससे आँखों को बचाएँ। इस बीमारी की जानकारी और बचाव के लिए पढ़ें — कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से कैसे बचें

आँखों की eighty % समस्या से बचा जा सकता है या ये ठीक हो सकती है। इसके लिए हमें आँखों को स्वस्थ रखने के तरीकों की जानकारी

अवश्य होनी चाहिए । आँखों के लिए क्या खाएँ, क्या ना खायें। किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए । स्वस्थ और सुन्दर आँखों के लिए क्या

करें। क्या आँखों की एक्सरसाइज होती है। जानिए ये सब और आँखों के लिए घरेलु नुस्खे जिनसे आँखें तेज होती है।
आँखे स्वस्थ रखने के घरेलु उपाय – Gharelu Nuskhe To maintain Eye Match
Ankhon Ki Roshni badhane ke tareeke

— सुबह मुँह में पानी भरकर आँखों पर (आँखें बंद करके ) ठण्डा पानी छिड़कें। इसे दिन में या शाम को जब भी आँखें थकी हुई महसूस हो

तब कर सकते है। इससे आँखों में ताजगी आ जाती है।



— 100 ग्राम बादाम भिगोकर छिलका निकाल दें और क़तर लें ( Flacks ), 50 ग्राम कतरी हुई अखरोट गिरी ( wallnut ), 50 ग्राम किसा

हुआ नारियल, two hundred and fifty ग्राम मिश्री, two hundred and fifty ग्राम सौंफ इन सबको मिलाकर रख लें। रोजाना खाना खाने के बाद चार चम्मच इसमें से लेकर अच्छे से

चबा चबा कर खा लें। दो महीने लगातार खाने से आँखें तेज, निरोग, सुन्दर हो जाती है। शानदार प्रयोग है।.
— नियमित रूप से आँखों की एक्सरसाइज करनी चाहिए। आँखों की एक्सरसाइज सीखने के लिए क्लीक करें और पढ़ें —

आँखों की 7 बेहतरीन एक्सर साइज

इसमें बहुत कम समय लगता है और कभी भी कर सकते है।

— धूल, धुआँ और तेज रौशनी से आँखों को बचाएँ।

— सिर धोने के लिए या चेहरा धोने के लिए अधिक गर्म पानी का उपयोग ना करें।
— गाजर, लाल टमाटर, आम, पपीता, केला, संतरा, दूध, खजूर, पत्ता गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियाँ आदि विटामिन ” The ” वाली चीजें

भोजन में शामिल करनी चाहिए। विटामिन ” The ” आँखों के लिए बहुत जरुरी होता है।

— सुबह खाली पेट आधा चम्मच ताजा मक्खन, आधा चम्मच पिसी हुई मिश्री और चौथाई चम्मच पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर खा लें। इसके

बाद कच्चे नारियल का एक टुकड़ा खा लें। फिर बारीक सौंफ आधा चम्मच खा लें। ये प्रयोग दो महीने लगातार करने से ऑंखें सुन्दर, स्वस्थ

और तेज हो जाती है।

— सुबह देर तक सोना और रात को देर तक जागना दोनों ही आँखों पर तनाव पैदा करते है। इससे आँखों का नूर चला जाता है और आँखें

रूखी और बेजान नजर आने लगती है।

आँख में फुंसी या गुहेरी है तो इसका उपचार जल्द करना चाहिए। आँख की फुंसी ठीक करने के लिए पढ़ें —

आँख की फुंसी का घरेलु उपचार

— तेज मिर्च मसाले वाले, तले हुए, खट्टे, बासी भोजन से आँखें कमजोर होती है। इन्हे कम ही लेना चाहिए।

— सुबह सूर्योदय से पहले नंगे पैर घास पर कुछ देर चलने से आँखों को ताजगी मिलती है। क्योंकि सुबह घास पर रात भर गिरी ओस की नमी

होती है जो शरीर की गर्मी शांत करती है और नेत्र ज्योति बढाती है।

— स्कूटर, बाइक या दूसरे वाहन के उपयोग के समय जिन पर तेज हवा लगती है आँखों के बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तेज हवा

आँखों के लिए नुकसान देह होती है।

— ऋतुचर्या यानि मौसम के हिसाब से खान पान व दिनचर्या में बदलाव का ध्यान रखें। अन्यथा आँखों पर असर पड़ता है।

— लेटकर बुक्स पढ़ने से या मोबाइल लैपटॉप आदि पर काम करने से आँखों पर दबाव बढ़ जाता है। अतः ऐसा ना करें।

— आँखों से कम दिखाई दे या लगातार सिरदर्द हो तो और चश्मे की जरुरत हो तो जरूर लगाएं।

— पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ।.

दांत में दर्द के देसी नुस्खे

दांत में दर्द सभी को कभी न कभी जरुर सताता है। ज्यादातर दांतों की सफाई का ध्यान नहीं रखने से ये समस्या होती है। कुछ भी खाने के

बाद दांतों में कुछ कण चिपके रह जाने के कारण बेक्टिरिया पनपने लगते है। ये बेक्टिरिया एसिड बनाते है जिसके कारण दांत में छेद हो जाता

है। जो काले बिंदु जैसा दिखता है। इसे ही दांत में कीड़ा लगना या दातों में कैविटी होना कहते है। इसमें अधिक खाना फसने लगता है और यह

बढ़ते हुए दांतों की जड़ तक चला जाता है। इसकी वजह से बहुत तेज दर्द होने लगता है। ठंडा गर्म दांतों को लगने लगता है। पानी पीना भी

मुश्किल हो जाता है।.
पीछे के तरफ दांतों की सफाई ब्रश नहीं पहुँच पाने के कारण सही तरीके से नहीं हो पाती इसलिए वहाँ कैविटी होने की सम्भावना अधिक होती

है। पीछे होने के कारण यह जल्दी से नजर भी नहीं आता और बढ़ता रहता है। अंत में दांत पूरी तरह नष्ट हो सकता है और दांत को निकलवाने

की नौबत आ सकती है। दांत मजबूत होते है तो जल्दी से दांत में कीड़ा या कैविटी नहीं होती है।



दांत की मजबूती के लिए कैल्शियम फास्फोरस, मैग्नीशियम आदि से युक्त पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
दूध, दही, पनीर, बादाम, मोटा अनाज, संतरा, सेब आदि नियमित रूप से भोजन में शामिल करने से पोषक तत्व मिलते है और दांत

मजबूत बने रहते है।

पौष्टिक आहार लेने से मसूड़े भी गुलाबी और स्वस्थ बने रहते है। किसी संक्रमण की वजह से मसूड़ों से खून आता हो या मसूड़े कमजोर हो

गए हों तो भी दांतों का हिलना या दांतों में दर्द आदि परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसी समस्या का तुरंत उपचार लेना चाहिए।

मसूड़ों से खून क्यों आता है इसके घरेलु उपाय जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

दाँत में दर्द के घरेलु नुस्खे – Gharelu nuskhe with regard to the teeth discomfort
कृपया ध्यान दें: किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते है।

दांत में दर्द होने पर Desi nuskhe बहुत फायदा पहुँचाते है। इनका उपयोग करके आप अपने दांतों का ख्याल रख सकते है। ये सभी

dant dard ke gharelu nuskhe घर में आसानी से मिलने वाली चीजों के उपयोग से बनते है। और गुणकारी होते है।

— कच्चे पपीते के दूध में चुटकी भर हींग व चुटकी भर कपूर मिलाकर इसे रुई में लेकर जिस दांत में दर्द हो उस दांत से दबाकर रखने से

दांत का दर्द ठीक होता है।
— बारीक पिसा सेंधा नमक सरसों के तेल में मिक्स करके मंजन करने से दांत के दर्द में आराम आता है, ठंडा पानी लगना मिटता है।



— जामुन के पत्तों को पानी में उबाल ले। इस पानी से दिन में दो तीन बार कुल्ला करने से दांत के दर्द में आराम मिलता है।

— तुलसी के पत्तों को सुखाकर चूर्ण बनाकर सरसों के तेल में मिलाकर हल्की मालिश करने से पायरिया में आराम आता है मसूड़े मजबूत

होते है।

— अमृतधारा में भीगी रुई दांत पर लगाने से दांत में दर्द ठीक होता है।

— गुनगुने पानी में चुटकी भर हल्दी व नमक मिलाकर दो तीन बार कुल्ले करने से कीड़े की वजह से दर्द में आराम मिलता है।

— फिटकरी को भूनकर बारीक पीस ले इसमें हल्दी मिलाकर दांतों पर मालिश करने से मसूड़े स्वस्थ होते है। फिटकरी और काली मिर्च

पीस कर लगाने से दांत में दर्द मिटता है।
— लोंग के तेल में रुई भिगोकर केविटी ( कीड़े का छेद ) में लगाने से फायदा होता है।

— अमरुद के पत्ते चबाने से दांत दर्द में आराम आता है। अमरुद के पत्ते पानी में उबालकर कुल्ला करने से मसूड़ों का दर्द व् सूजन ठीक

होते है।

— हल्दी और हींग पीस कर पानी मिला कर गोली बना लें। ये गोली जिस दांत में दर्द हो उससे दबाकर रखने से दांत का दर्द मिट जाता है।

— काला नमक कपड़े से छानकर तिल के तेल में मिक्स करके रोज मंजन करने से दांत मजबूत होते है।

— बारीक पिसी हल्दी, बारीक पिसी फिटकरी और कपडे से छना नमक अच्छे से मिक्स कर लें। इसे सरसों के तेल में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट

बनाकर मंजन करने से दांतों की सब तरह की तकलीफ मिटती है। दांत का दर्द ठीक होता है, दांत का हिलना ठीक होता है, ठंडा लगना

बंद होता है और दांत साफ होकर चमक जाते है।

— कुछ भी खाने या पीने के बाद सादा पानी से कुल्ला कर लेने से मुंह की सफाई हो जाती है और कीड़ा नहीं लगता।

— खाना खाने के बाद सलाद चबाकर खाने से दांतों में फंसे अन्न के कण निकल जाते है और सफाई हो जाती है।

दांत में कीड़ा लगने से बचने के 4 उपाय –

दांत में कीड़ा लगना एक आम समस्या है। इसके बारे में सभी जानते है। रोज नियम से ब्रश भी करते है। फिर भी दांत में कीड़ा लग जाता है।

जिसका पता ही नहीं चलता और एक दिन दांत में तेज दर्द के कारण परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा

सकता है। आइये देखें।



दांत में कीड़ा दांत पर जमा होने वाले मैल की परत (Plaque ) के कारण लगता है। और ये कोई कीड़ा नहीं होता। ये दाँतों की सही तरीके से

सफाई नहीं होने की वजह से दाँत को हुआ नुकसान है। जिसके कारण दांत की ऊपरी मजबूत परत ( Teeth enamel ) नष्ट हो जाती है। और दाँत

अंदर तक ख़राब हो जाता है। मैल की परत (Plaque) बनने के चार मुख्य कारण होते है:



— बैक्टीरिया

— लार

— एसिड.
— भोजन के कण

हम सभी के मुँह में बैक्टीरिया होते है। हमारे खाने पीने के सामान में यदि किसी भी रूप में शक्कर है। तो मुँह में रहने वाले बैक्टीरिया

तुरंत शक्कर को एसिड में बदलना शुरू कर देते है। भोजन के कण भी एसिड में बदल जाते है। दाँत का मजबूत इनेमल इस एसिड से दांत

की रक्षा करता है। किन्तु यदि किसी कारण से दांत का ये इनेमल कमजोर पड़ जाता है तो एसिड धीरे धीरे दांत को अंदर तक खोखला कर

देता है। ऊपर से सिर्फ छोटा सा काला बिंदु दिखाई देता है। लेकिन हो सकता है की अंदर से दांत ज्यादा नष्ट हो चूका हो।

दाँत में कीड़ा लगने के कारण – Factors associated with Hole
Dant me personally kide ka karan


दाँत का इनेमल कमजोर पड़ने के कई कारण हो सकते है। इनेमल के कमजोर पड़ने से कीड़ा किसी को भी लग सकता है। छोटे बच्चे जिनके

जिनके दूध के दाँत होते है उन्हें भी ये समस्या हो सकती है। सचेत रहकर नियमित रूप से दाँत चेक करने चाहिए। यदि काला बिंदु दिखाई दे

तो सतर्क हो जाना चाहिए। कुछ लोगों में दाँत में कीड़ा लगने या कैविटी बनने की सम्भावना बहुत अधिक होती है।.
शुरू में दाँत में बहुत छोटा छेद बनता है। इस समय किसी प्रकार का दर्द या परेशानी नहीं होती। लेकिन ये दाँत के नष्ट होने की शुरुआत है।
इसलिए तुरन्त इसका इलाज होना चाहिए ताकि तेज दाँत के दर्द की परेशानी से बचा जा सके। ये छोटा सा छेद ही दांतों की जड़ों तक पहुँच
कर तेज दर्द पैदा करता है। यदि इस स्थिति में भी इलाज ना हो तो इन्फेक्शन बढ़ कर खून में भी फ़ैल सकता है , पस पैदा हो सकता है।
परिस्थिति गम्भीर हो जाती है।

दांत में दर्द होने पर कुछ घरेलु नुस्खे अपनाने से आराम मिलता है। इन घरेलु नुस्खों को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

दाँत में कीड़ा लगने से बचने के 4 उपाय – Care of Teeth


कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल अक्षर से लिखे शब्द पर क्लिक करके उस शब्द के बारे में विस्तार से जानिये। 

दाँतो में कीड़ा ना लगे इसका ध्यान रखकर इस परेशानी से बच सकते है। ये  4  उपाय अपना कर दाँत में कीड़ा लगने से बचे रह सकते है ।

—  पौष्टिक खुराक लें। विशेषकर जिसमे कैल्शियम , मैग्नीशियम , विटामिन “D “, आदि पर्याप्त मात्रा में हो।
जैसे – दूध ,  पनीर ,  बादाम ,  तिल , दही , पत्तेदार सब्जियाँ , गाजर , सेब , दालें , संतरा , टोफू , साबुत या मोटा अनाज इत्यादि।

—  मिठाई ,चॉकलेट आदि मीठे और एसिड वाली खाने पीने की चीजों  का उपयोग कम करें। खासकर बाजार में मिलने वाला सॉफ्ट ड्रिंक
दांतों के इनेमल के लिए बहुत नुकसान देह होता है क्योकि इसमें फॉस्फोरिक एसिड और सिट्रिक एसिड होता है। दाँतों पर चिपकने वाली
चीजें खाने से बचें। यदि ऐसा कुछ खाया पिया है तो या तो ब्रश कर लें या अच्छे से कुल्ले करके दाँतों की सफाई कर लें ।

—  दाँतो की सफाई सही तरीके से करें। संभव हो तो डेंटिस्ट से सही तरीके से ब्रश करना सीख लें। हम बचपन से ब्रश करते आये है फिर
भी कीड़ा लगने का अर्थ यही है की ब्रश सही तरीके से नहीं हो रहा है। रात को ब्रश जरूर करना चाहिए। ये सुबह किये जाने वाले ब्रश से भी
ज्यादा अच्छा है।

—  पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ। इससे लार पर्याप्त मात्रा में बनती है जो दाँतो की सुरक्षा करती है। मसूड़े गीले रहते है जिससे उन पर भोजन
नहीं चिपकता। शरीर से वे विषैले तत्व बाहर निकलते है जिनसे दांतों को नुकसान होता है।

दाँत के कीड़े का इलाज – Tratment of Cavity

RCT kya hota he

कीड़ा लगने पर इसका इलाज समस्या की गम्भीरता पर निर्भर होता है। डेंटिस्ट को एक्स-रे करके भी देखना पड़ सकता है की दाँत अंदर से
कितना खोखला हो चूका है। डेंटिस्ट दाँत के ख़राब हुए काले हिस्से को छोटी ड्रिल मशीन से साफ करके उसमे चांदी या रेसिन भर देता है
ताकि दाँत अधिक ख़राब ना हो। इसे दाँत की फिलिंग करना कहते है।

यदि जड़ों तक दाँत ख़राब हो चुका है तो डेंटिस्ट रुट केनाल ट्रीटमेंट करता है जिसे आरसीटी  (RCT ) कहते है। इसमें जड़ तक ड्रिल से सफाई
करके रेसिन भर दिया जाता है। इसके बाद ऊपर कैप लगाई जाती है। ये कैप एक मजबूत खोल होता है जो असली दाँत जैसा दिखता है। इसके
लगाने से आरसीटी किये हुए दाँत का बचाव होता है। ये कैप जरूर लगवानी चाहिए अन्यथा दांत को अधिक नुकसान हो सकता है।
यदि किसी एक दाँत में कैविटी है तो यह पास वाले दाँत में भी लग सकती है और दूसरा दाँत भी ख़राब हो सकता है। इसलिए तुरंत कैविटी का
इलाज करवा लेना चाहिए।

सर्दी जुकाम खांसी के घरेलु उपचार

सर्दी जुकाम छोटा सा नाम है लेकिन पस्त करके रख देता है । नाक से पानी, छींक, सिरदर्द, खांसी आदि से बुरा हाल हो जाता है। नाक बंद

होने से साँस लेना भी मुश्किल हो जाता है। कभी कभी बुखार भी हो जाता है । अधिकतर मौसम परिवर्तन के समय ये तकलीफ सताती है।

सर्दी के मौसम में इसके बेक्टिरिया और वाइरस तेजी से फैलते है जो परेशानी का कारण बन जाते है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोध शक्ति कम

होती है उन्हें बार बार जुकाम हो जाता है। किसी किसी को एलर्जी के कारण भी जुकाम हो जाता है। डॉक्टर के पास जाने पर दी गई दवा से

भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता। इसके कारणों को समझकर gharelu nuskhe का सेवन करने से निश्चित रूप से आराम मिलता है।
सर्दी जुकाम के घरेलु नुस्खे – coughing as well as chilly gharelu upay
कृपया ध्यान दें: किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते है।

— सर्दी, जुकाम और हल्का बुखार होने पर 5 -6 तुलसी के पत्ते, एक लौंग, एक पीपड़ खरल में बारीक कूट पीस ले। इसे आधे कप पानी में

मिलाकर पी लें। बाद में आधा गिलास पानी पी लें। सुबह, शाम दो बार तीन दिन लेने से आराम मिलता है। ठंडा पानी और ठंडी चीजे लेना बंद

कर दे।
— एक कप पानी में 5 -6 तुलसी की पत्तियां उबालकर दिन में दो तीन बार पीने से जुकाम में राहत मिलती है।

— एक चम्मच शहद में दो चुटकी काली मिर्च के पाउडर मिलाकर चाटें। इसे सुबह शाम लेने से गला साफ होता है तथा जुकाम में आराम

मिलता है।

— गले में खराश या खांसी होने पर आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर लेने से बहुत आराम मिलता है।

— आधे ग्लास गरम पानी में आधी चुटकी हल्दी, एक चुटकी सेंधा नमक, तीन चार बूँद नींबू का रस डालकर दिन में तीन चार बार लेने से

जुकाम में बहुत आराम मिलता है।

— तीन चार लौंग ( clove ) सेककर पीसकर गर्म दूध में डालकर सोते समय पीने से जुकाम व खांसी ठीक हो जाती है।

— एक कप पानी में चौथाई चम्मच कसी हुई अदरक डालकर उबाल लें। इसे छानकर गुनगुना रहने पर एक चम्मच शहद मिलाकर पियें।

— एक कप पानी में एक चम्मच मेथीदाना डालकर उबालें। छानकर गुनगुना रहने पर पियें, चाहें तो थोड़ा शहद मिला लें, इसे सुबह शाम

लेने से सर्दी जुकाम ठीक होते है।
— कफ वाली खांसी हो तो फिटकरी को पीस कर तवे पर भून लें। इस भुनी फिटकरी में दुगनी मात्रा पिसी हुई मिश्री मिला दें। ये मिश्रण आधा

चम्मच सुबह शाम कुछ दिन लेने से बहुत लाभ होगा।

— अनार के छिलके और लौंग समान मात्रा में पीसकर शहद के साथ चाटने से खांसी में आराम आता है।

— अमरुद के ताजा कोमल पत्ते लगभग दस एक गिलास पानी में उबाल लें। छानकर शक्कर डालकर चाय की तरह पीने से खांसी जुकाम में

आराम मिलता है।

— अमरुद को भूनकर खाने से सर्दी खांसी जुकाम में आराम मिलता है। दो तीन दिन यदि सिर्फ ये अमरुद खाया जाये तो बहुत पुराना जुकाम

भी ठीक हो जाता है।

— सरसों का तेल अंगुली से नाक में लगाने से आराम रहता है, नाक में सूखापन या कड़ापन नहीं आता। नाक बंद नहीं होती।
— जिस तरफ का नाक का छेद जुकाम से बंद हो उसे ऊपर रखते हुए करवट लेकर सोने से बंद नाक खुल जाती है।.

टोन्सिल की परेशानी दूर करने के उपाय

टॉन्सिल की परेशानी एक आम समस्या हैं और ये कभी न कभी सबको होता है। वैसे तो टोन्सिल की परेशानी किसी भी उम्र में हो

सकती है परन्तु बचपन में कुछ ज्यादा होती है। टोन्सिल गले में मौजूद ग्रंथिया होती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक कार्य प्रणाली का हिस्सा है।

टोन्सिल हमारे शरीर को संक्रमण से बचाते हैं। जब मुंह से किसी प्रकार के बेक्टिरिया या वायरस प्रवेश करने करते हैं तो टोन्सिल उन्हें रोक

देते है। यह काम टोन्सिल श्वेत रक्त कणों की मदद से करते है। इससे हम बीमार होने से बच जाते हैं। इस प्रकार टोन्सिल हमें बीमारी से बचाते

हैं।.
जब टोन्सिल में संक्रमण हो जाता है तो इसे चिकित्सा की भाषा में टॉन्सिलाइटिस कहते है। आम भाषा में इसे टोन्सिल होना या घाटी बढ़ना

Ghati badhna कहते है। इसके कारण गले में दर्द, जलन, सूजन या बुखार हो सकता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को लगने वाला

रोग है। यानि यह रोग कॉन्टेजियस होता है। टॉन्सिल के कारण गले में दर्द या निगलने में परेशानी होने लगती है। गले में ललास या सूजन

सी दिखाई देती है या टोन्सिल पर सफ़ेद रंग के धब्बे भी दिखाई दे सकते है। ये धब्बे कभी कभी कड़क होकर पथरी जैसे बन जाते है। इन्हें

टॉन्सिल की पथरी Tonsil rock कहते है।.
टोन्सिल होने का कारण – Tonsil Ke Cause


टोन्सिल में संक्रमण होने का कारण बेक्टिरिया और वायरस होते है। यदि प्रतिरोधक क्षमता अच्छी ना हो टोन्सिल कमजोर पड़ जाते है

और वायरस आदि का मुकाबला नहीं कर पाते। इससे ये संक्रमित हो जाते है और इनमे दर्द होने लगता है। मौसम बदलने के कारण मार्च

और सितंबर में यह अधिक होता है। इस समय रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में प्रदुषण या धूल मिट्टी के कारण तकलीफ बढ़

जाती है। टॉन्सिलाइटिस होने का कारण सर्दी जुकाम के वायरस भी हो सकते है।



बच्चे स्कूल में या गार्डन में खेलते समय कई प्रकार के बैक्टिरिया या वायरस के संपर्क में आते हैं जिसके कारण उन्हें टॉन्सिलाइटिस होने की

संभावना अधिक होती है। टॉन्सिल तुरंत एक से दूसरे को फैलते है। अतः जिन्हें ये समस्या हो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए ।

अपने हाथ बार बार साबुन से धोने चाहिए। विशेषकर तब जब किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आयें जिसे यह इन्फेक्शन लगा हो या जिसे

सर्दी या जुकाम हो रहा हो।

टोन्सिल की परेशानी के लक्षण – Tonsillitis Sign

टोन्सिल होने पर कई प्रकार के लक्षण प्रकट हो सकते है। कुछ सामान्य लक्षण में इनमे से कुछ परेशानी महसूस हो सकती है।

— गले में दर्द, सूजन या चुभन आदि।.
— निगलने में परेशानी या दर्द।

— बोलने में परेशानी।

— मुंह से बदबू।

— बुखार

— कंपकंपी

— कान में दर्द

— सिरदर्द

— जबड़े के पास या गर्दन पर सूजन और दर्द।
— गले में टोन्सिल पर सफ़ेद या पीले धब्बे दिखना।



यदि बुखार 103 डिग्री से ज्यादा हो, कमजोरी लगने लगे, गर्दन अकड़ जाये, गले में चुभन और दर्द ज्यादा बढ़ जाये तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क

करना चाहिए। बार बार टॉन्सिल की परेशानी होने पर गले की जाँच के लिए डॉक्टर द्वारा गले से सैंपल लेकर उसे लेबोरेटरी में चेक किया जाता

है और गले में संक्रमण का कारण पता किया जाता है।

जिन लोगों को टॉन्सिलाइटिस लंबे समय तक बना रहता है उनकी नींद नहीं आने की परेशानी होने लगती है। क्योकि टॉन्सिल के कारण साँस

लेने में परेशानी होने लगती है जिससे नींद बार बार टूटती है। कभी कभी टोन्सिल के पीछे पस बन जाता है ऐसी स्थिति में आपरेशन करके पस

निकालने की जरुरत पड़ सकती है।



टोन्सिल का उपचार – Tonsillitis Remedy


यदि इन्फेक्शन और परेशानी कम हो तो विशेष उपचार की जरुरत नहीं होती। घरेलु नुस्खे अपनाने से इसमें आराम मिल जाता है। लेकिन यदि

लंबे समय तक तकलीफ रहे तो योग्य चिकित्सक से दवा लेनी चाहिए। दवा डॉक्टर के बताये अनुसार पूरी लेनी चाहिए।

कभी कभी टोन्सिल का आपरेशन करके टोन्सिल निकालने पड़ते है। यह आपरेशन तब किया जाता है जब दवा असर नहीं कर रही हो, या लंबे

समय से टोन्सिल ठीक नहीं हो रहे हों अथवा बार बार टॉसिल की परेशानी होती है। इस आपरेशन को टॉन्सिलैक्टोमी कहते हैं।

टोन्सिल होने पर घरेलु उपाय – Ghrelu Nuskhe With regard to Tonsil

— एक गिलास गुनगुने पानी में चौथाई चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें। यह गरारे दिन में तीन चार बार करने चाहिए।

— एक चम्मच शहद में एक चुटकी दालचीनी का पाउडर मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। आराम मिलेगा।

— एक गिलास गुनगुने पानी में चौथाई चम्मच सेंधा नमक और चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी मिलाकर कर गरारे करने इस टॉन्सिल ठीक

होते है।

— पानी में अजवाइन उबाल कर छान लें। इस पानी से गरारे करने से टॉन्सिल में आराम मिलता है।

— चिकनाई युक्त और तीखा खाना ना खाएँ। तली हुई चीजें ना खायें विशेषकर बाजार के तो बिल्कुल नहीं।

— गर्म पेय लेने चाहिए जैसे चाय, कॉफी, सूप, आदि ।

— दिन में तीन बार 5 पत्ते तुलसी, 5 काली मिर्च और थोड़ी अदरक पानी में उबाल कर गुनगुना पियें।

— तुलसी, पुदिना, अदरक उबाल लें। छान कर गुनगुना रहने पर थोड़ा शहद मिलकर पियें। दिन में तीन बार लें।

— एकगिलास पानी में चौथाई- चौथाई चम्मच हल्दी, सेंधा नमक और बायबिडंग ( पंसारी के यहाँ मिलती है ) डालकर उबाल लें। इसे छान

लें। सहन होने लायक गर्म रहे तब इस पानी से गरारे करें। इस प्रकार रात को सोते समय और दिन में दो बार गरारे करें। इससे टॉन्सिल ठीक

होते है।

— खूब पानी पीना चाहिए और रेस्ट करना चाहिए। इससे टॉन्सिल जल्दी ठीक होते है।

— सूखी और ठंडी हवा से बचें।

— धूम्रपान न करें।.

फेस स्क्रब से लायें चेहरे पर चमक

फेस स्क्रब सौन्दर्य वृद्धि का वह तरीका है जिसमे फेस स्किन की डेड सेल्स हटाई जाती है और नई त्वचा को उभारा जाता है। इससे

फेस स्किन में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। स्किन में एक नयी जान आ जाती है। फेस स्किन लंबे समय तक सुन्दर और जवां बनी रहती है।

फेस स्क्रबर में कई प्रकार के स्किन के लिए फायदेमंद चीजें मिलाई जाती है। इस वजह से स्किन को पोषण मिलता है। इससे स्किन की

प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है जिससे मुँहासे फुंसी आदि से बचाव होता है। बिना मेकअप के भी चेहरा हमेशा खिला खिला रहता है।
सुंदर, स्वस्थ और चमकीली त्वचा बिना मेकअप के भी सबके मन को भाती हैं। इसके लिए महँगे सौन्दर्य प्रसाधन की जरूरत नहीं होती है।

घर पर ही थोड़ी सी नियमित देखभाल जैसे फेस स्क्रब आदि के उपयोग से आसानी से आपका चेहरा सुंदर, कोमल और चमकीला नजर आ

सकता है।

जैसा की आप जानते है, चेहरे की देखभाल में क्लीन्सिंग, स्किन टोनिंग और मॉश्चराइजिंग आदि की जरूरत होती है। परन्तु ये सब करने के

बाद भी चेहरे पर डेड सेल्स हटाने बहुत जरुरी होते है। अन्यथा तेज़ धूप, सफ़र, थकान, आदि के कारण चेहरा मुरझा जाता है।सुंदर, स्वस्थ और चमकीली त्वचा बिना मेकअप के भी सबके मन को भाती हैं। इसके लिए महँगे सौन्दर्य प्रसाधन की जरूरत नहीं होती है।

घर पर ही थोड़ी सी नियमित देखभाल जैसे फेस स्क्रब आदि के उपयोग से आसानी से आपका चेहरा सुंदर, कोमल और चमकीला नजर आ

सकता है।

जैसा की आप जानते है, चेहरे की देखभाल में क्लीन्सिंग, स्किन टोनिंग और मॉश्चराइजिंग आदि की जरूरत होती है। परन्तु ये सब करने के

बाद भी चेहरे पर डेड सेल्स हटाने बहुत जरुरी होते है। अन्यथा तेज़ धूप, सफ़र, थकान, आदि के कारण चेहरा मुरझा जाता है।
इसके अलावा ब्लैक हेड, वाइट हेड जैसी समस्याओ का सामना भी करना पड़ सकता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए फेस

स्क्रबर की जरूरत होती है जो घरेलु सामान से आसानी से किया जा सकता है। नीचे इनके बारे में डिटेल में बताया गया है।

घर पर ही आपको ब्यूटी निखारने के अच्छे साधन प्राप्त हो सकते है जो इसी वेब साईट बताये गए है । इन्हें भी जरूर आजमा कर देखें।

ब्यूटी निखारने के घरेलू साधन Gharelu Nuskhe with regard to elegance के लिए क्लीक करें और इन्हें जानें:

होम मेड स्किन टोनर से निखारें चेहरा

हर्बल मेनिक्योर, फ्रूट मेनिक्योर, चॉकलेट मेनिक्योर के तरीके

हेयर स्पा घर पर कैसे करें

हेयर मास्क कैसे बनाये

मेनिक्योर घर पर कैसे करें

फेस स्क्रब कैसे करें – How you can Wash Encounter Pores and skin


नीचे दिए गए फेस स्क्रब में से अपनी स्किन के हिसाब से चुन कर फेस स्क्रब बना लें।


स्क्रब का उपयोग करने से पहले चेहरे को साफ पानी से अच्छे से धो ले।


स्क्रब को चेहरे पर लगा कर नीचे बताये अनुसार कुछ वक्त लगा रहने दे।


हल्के हाथ से गोल गोल मसाज करें। बहुत अधिक देर तक और अधिक दबा कर मसाज ना करें।


साफ पानी से अच्छे से धो ले।


धोने के बाद चेहरे को साफ और नर्म तौलिये से थपथपा कर सूखा लें।


घिस कर नहीं पोंछें।


चेहरे की स्किन बहुत नाजुक होती है अतः बहुत हल्के हाथ से ही मसाज करें।


कुछ स्क्रब चेहरे पर लगा कर रखे नहीं जाते चेहरे पर मसाज के बाद तुरंत धो दिए जाते है। उन्हें उसी प्रकार यूज़ करें।


फेस स्क्रब कितने दिन में करें – Encounter Wash Kitne Din Me personally Kare


शुरुआत में एक सप्ताह तक फेस स्क्रब का उपयोग एक दिन छोड़ कर करे (alternate day time ) ।


अगले सप्ताह दो दिन छोड़कर करें।


इसके बाद सप्ताह में एक बार (weekly ) फेस स्क्रब करें।


सप्ताह में एक बार फेस स्क्रब हमेशा किया जा सकता है।


कुछ फेस स्क्रब जैसे जेल स्क्रब रोजाना भी किये जा सकते है। इनमे कोई खुरदरी वस्तु नहीं होती।


फेस स्क्रब करते समय सावधानी – Be cautious


— कोई भी स्क्रबर बहुत अधिक खुरदरा न हो अन्यथा स्किन पर जलन हो सकती है या स्किन पर स्क्रेच पड़ सकते है।
— फेस स्क्रबर पुराना नहीं होना चाहिए।

— स्क्रब बनाते समय ध्यान रखें यह बहुत अधिक गाढा या पतला नहीं हो एक लेप ( Insert ) की तरह होना चाहिए। गाढ़ापन कम करने के

लिए गुलाब जल का भी उपयोग किया जा सकता है ।

— यदि फेस पर चोट या कट आदि हो या बड़े पिम्पल्स हो तो फेस स्क्रब ना लगाएं ।

— फेस स्क्रब को धोने के बाद चेहरा साफ और नर्म तौलिये से थपथपा कर सुखाएं। घिस कर कदापि नहीं पोंछें।

— स्क्रबर के उपयोग से नई मुलायम स्किन बाहर आती है इसलिए स्क्रब करने के तुरंत बाद तेज धूप मे न जाए, हो सके तो स्क्रब का

उपयोग रात को करे।

— वैसे तो नीचे दिए गए फेस स्क्रब के सभी सामान घरेलु है। जिनसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। फिर भी यदि आपको फेस स्क्रब की किसी भी सामग्री एलर्जी हो तो वह यूज़ ना करें। आपको जिस तरह का स्क्रब सूट करता हो वही लगाएं।
विभिन्न प्रकार के फेस स्क्रब बनाकर यूज़ करने के तरीके
बादाम का पाउडर — 1 चम्मच

ओलिव आयल — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकतानुसार



बादाम पाउडर, ओलिव आयल को मिक्स करे अब इसमें दूध डालकर पेस्ट तैयार कर ले। चेहरा साफ पानी से धो कर यह पेस्ट लगाए। 5 -7

मिनिट बाद हलके हाथ से सरक्यूलर मोशन में चेहरे की मसाज करे व साफ पानी से चेहरा धो ले। चेहरा दमकने लगता है साधारण व ड्राई

स्किन के लिये बहुत अच्छा है।

चॉकलेट स्क्रब – Dark chocolate Wash

चॉकलेट पाउडर — डेढ़ चम्म्च

शहद — 1 /2 चम्मच

दही — 1 चम्मच

चॉकलेट पाउडर, शहद, और दही इन तीनो को मिलाकर पेस्ट बनायें। चेहरे पर लगाएं। दस मिनट बाद चेहरे पर हलके हाथ से मसाज

करें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे त्वचा मुलायम होती है, रूखापन दूर होता है, मृत कोशिकाएं दूर हटती है। असमय पड़ने वाली

झुर्रियों से बचाव होता है। तथा चेहरे को गोरा ( Reasonable Pores and skin ) बनाता है। यह ड्राई और झुर्रियों ( Facial lines ) वाली स्किन के लिए बेहतर

स्क्रब है।

एलो वेरा स्क्रब – Aloe Observara Wash
एलोवेरा पल्प — एक चम्मच

दही — एक चम्मच

एलो वेरा पल्प और दही मिलाकर पेस्ट बनायें। और चेहरे पर लगा लें। दस पंद्रह मिनट बाद हलके हाथ से मसाज करते हुए धो लें। इसमें एंटी

इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण सन बर्न से झुलसी त्वचा को ठंडक पहुँचाता है। त्वचा की रंगत सुधारता है। यह एक प्राकृतिक मोइश्चराइजर है।

यह जेल स्क्रब होने के कारण इसे रोजाना यूज़ किया जा सकता है।

सेंडल वुड स्क्रब – Sandal Wooden wash

चन्दन पाउडर — 1 /2 चम्मच

जौ का आटा — 1 चम्मच

दही — 1 चम्मच

चन्दन पाउडर, जौ का आटा और दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं व 5 -7 मिनिट बाद हलके हाथ से मसाज कर लें।

फिर गुनगुने पानी से धो ले। दाग धब्बे झाइयां मिटाता है। यह स्किन को ठंडक पहुँचाता है। एंटी बेक्टिरियल होता है। जिसके कारण मुँहासे

और फुंसी आदि को ठीक करता है। इस सप्ताह में दो बार लगा सकते है।

हनी स्क्रब – Sweetie Wash.
शहद — 1 /2 चम्मच

बेकिंग सोडा — 1 /4 चम्मच

दही — 1 चम्मच



शहद, बेकिंग सोडा और दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर 8 -10 मिनट लगा कर रखें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। इससे ब्लैक हेड

और व्हाइट हेड निकल जाते है व त्वचा की रंगत सुधरती है। इसे नार्मल और ऑइली स्किन पर यूज़ कर सकते है।

टोमेटो स्क्रब – Tomato Wash


टमाटर रस — two चम्मच

शक्कर — 1 चम्मच

मिल्क पाउडर — 1 /2 चम्मच

टमाटर का रस, शक्कर और मिल्क पाउडर को मिला कर पेस्ट बना लें। यदि गाढ़ा लगे तो इसमें गुलाब जल मिला लें। इस चेहरे पर लगाकर

बहुत हल्के हाथ से मसाज करें। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। यह खुरदरी और सनबर्न से झुलसी हुई फेस स्किन के लिए बहुत

कारगर स्क्रब है। ध्यान रहे शक्कर के दाने बहुत बड़े ना हो और मसाज भी बहुत हल्के हाथ से हो।

पपाया फ्रूट स्क्रब – Papaya Wash.
पपीता पल्प — two चम्मच

शहद — 1 चम्मच

चीनी — 1 चम्मच

पपीते का गूदा पीस लें, इसमें शहद और चीनी अच्छे से मिला लें। इसे चेहरे पर लगायें। 10 मिनट चेहरे पर लगा रहने दें। इसके बाद हल्के

हाथ से मसाज करें। अब गुनगुने पानी से धो लें। यह बहुत शानदार स्क्रब है। चेहरे की रंगत सुधरता है, दाग धब्बे मिटाता है, झुर्रियों से बचाता

है। सभी प्रकार की स्किन पर इसका जादुई प्रभाव देखने को मिलता है।

चिरोंजी स्क्रब – Charoli Wash.
चावल का आटा — 1 चम्मच

चिरोंजी पाउडर — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकता अनुसार



चावल का आटा, चिरोंजी पाउडर मिलाकर इसमें जरूरत के हिसाब से दूध डालकर पेस्ट बना लें। इसे दस मिनट के लिए चेहरे पर लगा कर

रखें। हल्के हाथ से मसाज करके साफ पानी से धो लें। बेजान त्वचा के लिए अच्छा स्क्रब है। इससे मृत कोशिका हट जाती है। चेहरे पर निखार

आ जाता है। त्वचा एकसार हो जाती है। ब्लैक हेड व्हाइट हेड मिट जाते है। यह स्क्रब हर प्रकार की स्किन के लिए उपयुक्त है।

हर्बल स्क्रब – Natural Wash


त्रिफला चूर्ण — 1 /2 चम्मच

मुल्तानी मिट्टी — 1 चम्मच

नारियल तेल — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकता अनुसार

त्रिफला चूर्ण एकदम बारीक पिसा हुआ या छना हुआ लें। इसमें मुल्तानी मिट्टी और नारियल का तेल मिला लें। अब आवश्यकता के अनुसार

दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 5 मिनट तक चेहरे पर लगा कर रखें। अब हल्के हाथ से मसाज करें। गुनगुने पानी से धो लें। इसमें स्किन के

लिए लाभदायक विटामिन और मिनरल होते है। इससे त्वचा को सम्पूर्ण पोषक तत्व प्राप्त होते है। सिकन साफ होकर चमकने लगती है।

त्वचा के सभी तरह के विकार समाप्त करता है। यह ऑयली स्किन के लिए अच्छा स्क्रब है।

नाख़ून स्वस्थ और सुन्दर बनाने के घरेलु उपाय

नाख़ून स्तनधारियों की पहचान है। यह कठोर पारदर्शी प्रोटीन केराटिन से बना होता है। बाल भी इसी प्रोटीन से बने होते है। यह प्रोटीन

मृत कोशिकाओं से बनता है। नाखुन का काम अँगुलियों को चोट आदि से बचाना होता है। यह सौन्दर्य बढ़ाने में भी योगदान देता है।

अँगुलियों के नाखुन एक महीने लगभग four मिलीमीटर तक बढ़ सकते है तथा पैर के नाखुन एक महीने में लगभग two मिलीमीटर बढ़ पाते है।
नाख़ून की सुंदरता व रख रखाव के कई व्यापार चल रहे है जैसे नेल पोलिश, नेल आर्ट, नेल क्रीम, क्यूटिकल क्रीम, मेनिक्योर आदि। नाखुन

के विभिन्न शेप देकर तथा नेल पोलिश, नेल आर्ट से सजा कर सौन्दर्य में वृद्धि की जा सकती है। नाखुन को मेनिक्योर से साफ व सुंदर रखा जा

सकता है। इसके लिए पार्लर में महँगे रासायनिक तत्वो के उपयोग के बजाय घर पर ही नियमित मेनिक्योर आदि करने से नाखुन को

नुकसान नहीं होता और परिणाम अच्छा मिलता है। देखें घर पर मेनिक्योर करने का तरीका

कृपया ध्यान दें: किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते है

नाख़ून कैसे बनता है

नाख़ून सिर्फ वह नहीं जो दिखाई देता है। जो दिखाई देता है वह नेल प्लेट कहलाता है। इसके नीचे नेल बेड होता है जो सामान्य त्वचा जैसाही होता है। नेल बेड के नीचे नेल मेट्रिक्स होता है। नेल मेट्रिक्स पर ही नाख़ून का बनना और उनका आकार निर्भर करता है। नेल मेट्रिक्स

को मिलने वाले पोषक तत्व ही नाख़ून के हेल्थी या कमजोर होने के लिए जिम्मेदार होते है।.

नाख़ून पर बुरा प्रभाव पड़ने के कारण

नाख़ून के बढ़ने तथा अच्छे होने या ना होने के अनेक कारण होते है। वातावरण के तापमान का भी नाख़ून पर प्रभाव पड़ सकता है।

सामान्यतया गर्मी के मौसम में नाख़ून व बाल जल्दी बढ़ते है और सर्दी में धीरे धीरे बढ़ते है। पोष्टिक भोजन की कमी, डिप्रेशन, किसी रोग

की वजह से या संक्रमण आदि होने के कारण भी नाखुन धीरे बढ़ते है तथा उनका लुक ख़राब हो सकता है।

पानी तथा दैनिक उपयोग के साफ सफाई के साधन जैसे साबुन या बर्तन धोने का लिक्विड आदि में हाथ ज्यादा समय रहने से नाखुन का

सौन्दर्य चला जाता है। किसी प्रकार की चोट या रगड़ आदि के लगने से नाखुन कट फट जाते है।

जहाँ नाख़ून और त्वचा मिलते है उस जगह को क्यूटिकल कहते है। ये क्यूटिकल संक्रमण होने से बचाते है, तथा बेक्टिरिया आदि को अंदर

प्रवेश नहीं होने देते। इसीलिए क्यूटिकल का भी ध्यान रखना चाहिए अन्यथा इनमे फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।
नाख़ून देखकर बीमारी का अंदाजा लगाएँ

नाखून का रंग, मोटाई या आकार में होने वाले परिवर्तन को किसी शारीरिक समस्या या रोग का संकेत समझा जाता है। किस परिवर्तन से

कौनसे रोग का अंदाजा लगाया जाता है इस बारे में यहाँ कुछ संकेत बताये जा रहे जो सतर्क होने के लिए जानकारी है। किसी भी नतीजे पर

पहुँचने के लिए चिकित्सक का परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

— नाखुन यदि पीले व फीके हो रहे है तो सम्भावना है कि आप कुपोषण, एनीमिया, लिवर प्रॉब्लम, पीलिया, फंगल इन्फेक्शन, मधुमेह,

थायरॉइड, सिरोसिस आदि में से किसी समस्या से ग्रस्त हों ।

— नाखुन सफ़ेद हो गए हों सिर्फ आगे एक बारीक लकीर गुलाबी रह गई हो तो यह हेपेटाइटिस जैसी लिवर समस्या को दर्शाता है।

— नाख़ून जल्दी जल्दी टूट रहे है ओर सूखे महसूस हो रहे है तो यह थायरॉइड का संकेत हो सकता है। या हो सकता है आप केमिकल ज्यादा

उपयोग में ले रहे है जैसे नेल पोलिश, साबुन या सर्फ।
— रूखे बेजान नाखुन विटामिन सी, फॉलिक एसिड, ह्रदय रोग या रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण हो सकते है।
— यदि नाखुन नीले पड़ रहे है तो ऑक्सीजन की कमी, निमोनिया, फेफड़ो में इन्फेक्शन हो सकता है।

— ज्यादा उभरे हुए नाखुन दर्शाते है, कि ऑक्सीजन का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो रहा या ऑतो या फेफड़ो में सूजन हो सकती है।

— यदि आपके नाखुन बीच में सा दबकर चम्मच जैसे हो गए है तो यह आयरन की कमी को दर्शाता है।

— नाख़ून पर बनने वाली लकीरें प्रोटीन की कमी के कारण हो सकती हैं।

— नाखुन में सफेद लाइन व सफेद धब्बे लिवर या ह्रदय रोग की और संकेत हो सकता है।

नाख़ून आकर्षक और स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएँ

यदि आप स्वस्थ है और पोष्टिक भोजन ले रहें है तो नाख़ून खूबसूरत, गुलाबी और चमकीले नजर आएंगे।

हरी पत्तेदार सब्जियों से विटामिन ए, सी, इ, के और बी कॉम्प्लेक्स मिलते है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नेशियम और पोटेशियम के

ये अच्छे स्रोत होते है। इनमे बायोटिन, आयरन प्रोटीन भी मिलते है। इन सबसे नाख़ून आकर्षक और मजबूत होते है। अतः हरी पत्तेदार

सब्जियों को अपने आहार में पर्याप्त स्थान दें।

दूध, दही, अंकुरित अनाज से कैल्शियम तथा कई प्रकार के नाख़ून के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते है। इनका उपयोग करें।

इसके अलावा सूखे मेवे जैसे बादाम, अख़रोट, किशमिश और फल जैसे आम, अनार, केला, संतरा, आँवला आदि का भरपूर उपयोग करें।

शकरकंद, गाजर, कददू आदि में विटामिन ए, प्रोटीन, बायोटिन तथा ओमेगा -3 फैटी एसिड होने की वजह से नाख़ून के लिए ये बेहतर

पोष्टिक भोजन साबित होते है। इन्हें अवश्य लें।

नाख़ून मजबूत, चमकीले करने तथा बढ़ाने के घरेलु नुस्खे

— कमजोर व पीले नाख़ून के लिए रुई के फाहे से नींबू का रस लगाए या नींबू का छिलका रगड़े थोड़ी देर बाद साफ पानी से हाथ धो ले,

कुछ ही दिन में नाख़ूनो में कुदरती चमक व मजबूती आ जायेगी।

— नाख़ून के आस पास की क्यूटिकल व त्वचा कड़क गई हो, पक गई हो या कोई संक्रमण हो गया तो नींबू के हरे पत्ते पीस कर थोड़ा सा

नमक मिलाकर लगाए पंद्रह दिन में ही फर्क पड़ जाएगा।

— नाख़ून सख्त दिखते हुए भी ऑक्सीजन लेते है जो नेल बेड तक पहुँचती है। अतः लगातार नाख़ून पर नेल पोलिश लगाकर रखने से और

बार बार केमिकल से नेल पोलिश साफ करने से नाख़ून कमजोर और फीके हो जाते है।

— नाखुनो को गुनगुने पानी में पाँच मिनट डुबोने के बाद गुनगुने जैतून के तेल से हल्की मालिश करे।

— नाखुन कटना फटना, बदरंग होना, मोटे होना आदि समस्या के छुटकारे के लिए 100 ग्राम चुकन्दर का रस रोज पिएँ।

— आयरन, विटामिन डी व कैल्शियम की पूर्ति के चुकुन्दर का सलाद नियमित रूप से लें ।

— गर्म पानी में नमक मिलाकर 10 मिनट तक रोजाना एक महीने तक सेक करने से नाखुन बढ़ने लगते है।

— नाखुन टूटे, फटे या त्वचा से अलग हो रहे हो तो सरसो के गुनगुने तेल में दस मिनट के लिए डुबो कर रखे व बाद मे हल्के हाथ से मालिश

करे।

— नाख़ून पर लहसुन की कली को थोड़ा पीस कर कुछ देर घिसे कुछ दिनों मे ही नाख़ून बढ़ने लगेंगे।

— नाखुनो का रुखापन दूर करने के लिए मक्खन या पेट्रोलियम जेली से मालिश करे।

— नाखूनो का फीकापन दूर करने के 10 ग्राम काली किशमिश को धोकर एक कप पानी में रात को भिगोकर सुबह किशमिश को अच्छी

तरह चबा चबाकर खाये व कप वाला पानी पी ले। एक महीने तक इसका प्रयोग करने पर नाखून के साथ त्वचा की रंगत में भी फर्क अवश्य

पाएंगे।

— हाथो की नमी बनाये रखने के लिए मॉइश्चराजर या नारियल का तेल नियमित रूप से लगाना चाहिए।

— डार्क कलर की नेलपोलिश लगाने से पहले प्राइमर कोट अवश्य लगाए।

— नेल रिमूवर से घिस कर नेल पेंट साफ नहीं करना चाहिए। एक रुई के फाहे में नेल रिमूवर लेकर नाख़ून पर रखे व हल्के हाथ से नेल

पॉलिश साफ करे।

— घर के काम विशेष कर बर्तन साफ करने के लिए दस्तानो का इस्तेमाल करे।

— नाखुनो का प्रयोग किसी भी जगह को खुरचने में या डिब्बे आदि को खोलने के लिए न करे।

— पैर के नाख़ून ख़राब होने से बचाने के लिए सूती मोज़े ही पहनें। गीले व टाइट जूते चप्पल नहीं पहनें।.

ब्लैक हेड मिटाने के उपाय

ब्लैक हेड की परेशानी लगभग सभी को होती है। विशेष कर यौवन काल में प्रवेश करते समय। चेहरे पर छोटे छोटे काले दाने नजर आते है।

छूने पर कड़क महसूस होते है। हल्का सा कुचरने से एक दाना सा निकलता है जो अंदर से मटमैले रंग का होता है। इसके निकलने पर हल्का

सा दर्द भी महसूस हो सकता है। यही ब्लैक हेड होता है। इसका बाहर नजर आने वाला हिस्सा काले रंग का होता है। इसलिए इसे ब्लैक हेड

कहते है। इसकी वजह से चेहरे की सुंदरता निखर नहीं पाती और शर्मिंदगी महसूस होती है।.

ब्लैक हेड क्यों हो जाते हैं

हमारी त्वचा और बालों को रूखेपन से बचाने के लिए रोम छिद्र में सीबेशस ग्रंथिया होती है। इन ग्रंथियों से सीबम नामक तेलीय पदार्थ

निकलता है जो हमारे शरीर पर मौजूद बाल और त्वचा को मोइश्चर देने का काम करता है। इससे त्वचा कोमल, नम बनी रहती है और ग्लो

बना रहता है । यह सीबम फैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लिसराइड्स आदि अवयवों से बना होता है। सीबम से त्वचा की रक्षा होती है। जब

यह सीबम अधिक मात्रा में बनता है और रोम छिद्र बड़ा होता है तो यह त्वचा के रोम छिद्र में इकठ्ठा हो कर त्वचा की मृत कोशिका के साथ

मिलकर कई प्रकार की परेशानी पैदा कर देता है।
जब यह सीबम त्वचा के बाहर निकलता है तो ऑक्सिडेशन के कारण यह काला पड़ जाता है। जो ब्लैक हेड के रूप में नजर आता है।

यदि यह रोम छिद्र बारीक़ होने के कारण त्वचा के बाहर नहीं निकलता अंदर ही इकठ्ठा हो जाता है तब यह व्हाइट हेड के रूप में नजर

आता है।
कुछ लोग गन्दगी को ब्लैक हेड बनने का कारण समझते है। फिर त्वचा को बार बार धोते है और घिस कर साफ करते है। ऐसा बिल्कुल नहीं

करना चाहिए। इससे त्वचा रूखी हो जाती है और रूखेपन को मिटाने के लिए सीबम का स्राव और बढ़ हो जाता है। इससे परिस्थिति सुधरने

के बजाय बिगड़ती है। इन्फेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

ब्लैक हेड चेहरे पर अधिक होते है। इसके अलावा गर्दन और छाती पर भी हो सकते है। क्योकि चेहरे, गर्दन और छाती पर रोम छिद्र तथा

सीबेशस ग्रन्थियां दूसरी जगह की अपेक्षा कई गुना अधिक होते हैं।

ब्लैक हेड होने के मुख्य कारण –

— जैसा की ऊपर बताया गया है सीबम का स्राव बढ़ने के कारण ब्लैक हेड हो जाते है। सीबम का स्राव बढ़ने का एक कारण यौवनकाल में

प्रवेश के समय हार्मोन का बदलाव होता है। इस समय सीबम का स्राव अधिक मात्रा में होने के अलावा त्वचा की कोशिकाओं के बनने और
मिटने की गति भी बढ़ जाती है । इस वजह से ब्लैक हेड, व्हाइट हेड, मुहांसे आदि अधिक होते है। यह परेशानी यौवनकाल में प्रवेश करते

समय लड़के और लड़की दोनों को हो सकती है।

— कभी कभी कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में या मासिक धर्म के समय भी यह समस्या बढ़ सकती है।

— अधिक मात्रा में कॉस्मेटिक्स का यूज़ ब्लैक हेड बनने का कारण बन सकता है।

— अधिक पसीना या अधिक नमी के कारण ब्लैक हेड बन सकते है ।

— किसी बीमारी या किसी दवा के कारण कोशिकाओं बनने व मिटने की गति में परिवर्तन हो सकता है। इससे ब्लैक हेड बनने लगते है।

ब्लैक हेड इस कारणों से नहीं होते है:

— चेहरे को बार बार नहीं धोना – कुछ लोग सोचते है कि चेहरा बार बार नहीं धोते है, इसलिए ब्लैक हेड हो जाते है लेकिन यह सही नहीं है।

बल्कि बार बार चेहरा धोने या घिस कर धोने से स्थिति बिगड़ सकती है। इससे त्वचा रूखी हो जाती है और इसे मिटाने के लिए सीबम का स्राव
बढ़ जाता है। इससे ब्लैक हेड बढ़ भी सकते है। इन्फेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की चेहरे की

सफाई का ध्यान ना रखें ।

— चॉकलेट या मेवे खाने से ब्लैक हेड अधिक नहीं होते है। कुछ लोग मानते है की इन्हें खाने से ब्लैक हेड होते है।

— हस्त मैथुन या सहवास – यह आम भ्रान्ति है की सहवास करने से या हस्तमैथुन करने से ब्लेक हेड या मुहांसे आदि हो जाते है। जैसा की

ऊपर बताया गया है इसके लिए सीबम का अधिक स्राव मुख्य कारण होता है। यौवन काल में यह स्राव अधिक होने के कारण ऐसा भ्रम पैदा

हो जाता है कि इसका कारण हस्त मैथुन हो सकता है। परंतु यह सही नहीं है।

ब्लैक हेड मिटाने के घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe With regard to Dark Mind

ब्लैक हेड मिटाने के लिए त्वचा रूखी भी नहीं रहनी चाहिए और अधिक मात्रा में कॉस्मेटिक का यूज़ भी नहीं होना चाहिये। मोइश्चराइजर बिना

तेल वाला काम में लेना चाहिए। डेड स्किन सेल्स लगातार त्वचा पर से हटाये जाने चाहिए। क्योकि ब्लैक हेड बनने में ये मदद करते है। इसके

अलावा त्वचा में कसावट लायी जानी चाहिए। इस सब के लिए कुछ घरेलु उपाय नीचे बताये गए है इन्हें नियमित काम में लेने से ब्लैक हेड से

छुटकारा मिल जाता है।

मुल्तानी मिटटी

मुल्तानी मिटटी रोम छिद्र से तेलीय पदार्थ तथा मेल आदि को सोख कर उसे साफ कर देती है। जब मुल्तानी मिट्टी का लेप चेहरे पर लगते है

तो मिट्टी में मौजूद लाभदायक तत्व त्वचा को मिलते है। साथ ही मिट्टी ब्लैक हेड को बाहर निकाल देती है। इस लेप से त्वचा में रक्त संचार भी

बढ़ता है जो त्वचा को सुंदर बनाता है।

मुल्तानी मिट्टी का लेप बनाने के लिए इसमें पानी, गुलाब जल, एप्पल सिडार विनेगर, दूध, दही, एलोवेरा जेल आदि में से कुछ भी मिलाया

जा सकता है। आप अपनी पसंद के हिसाब से या जो भी उपलब्ध हो, मुल्तानी मिट्टी का लेप उपरोक्त में से मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को

लगाने के बाद दस पंद्रह मिनट तक लगाये रखें। सूखने के बाद पानी से धो लें। इसके बाद हल्का सा मोइस्चराईजर लगा लेना चाहिए। एक दो

बार लेप लगाने से आपको अंदाज हो जाता है की आपको किस प्रकार का लेप सूट करता है, जिसके रिजल्ट ज्यादा अच्छे मिलते है।
दूध-शहद
दूध और शहद दोनों त्वचा के लिए बहुत फायदेंमंद होते है। शहद में एंटी बेक्टिरियल गुण होते है तथा दूध से त्वचा मुलायम और लचीली बनती

है। ब्लैक हेड हटाने के लिए एक चम्मच शहद और एक चम्मच दूध मिलाकर हल्का सा गुनगुना कर लें। अब अच्छे से मिलाकर सही तापमान

होने पर एक पतली परत ब्लैक हेड वाली जगह पर लगा लें। इसके ऊपर रुई की एक पतली परत दबाकर चिपका दें। बीस मिनट सूखने दें।

इसके बाद ध्यान से रुई की परत को निकाल दें। अब ठन्डे पानी से धो लें और मोइस्चराईजर लगा लें। इसे कुछ दिन नियमित करने से ब्लैक

हेड निकल जाते है तथा नए ब्लैक हेड नहीं बनते।

दालचीनी-शहद
शहद और दालचीनी दोनों में एंटी बेक्टिरिया तत्व होते है। इसलिए यह ब्लैक हेड मिटाने में बहुत कारगर साबित होता है। दालचीनी रक्त

संचार बढ़ाती है। जिसके कारण त्वचा कोमल और चमकदार बनती है। इसके लिए एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच बारीक दालचीनी

पाउडर मिलाकर एक पतली परत ब्लैक हेड वाली जगह पर लगा लें। इसके ऊपर रुई की एक पतली परत दबा कर लगा दें। दस पंद्रह मिनट

के बाद इसे ध्यान पूर्वक निकाल दें। अब धो लें और मोइस्चराईजर लगा लें। दालचीनी का उपयोग मसाले की तरह खाने पीने के सामान में भी

करना चाहिए। इससे कुछ ही समय में ब्लैक हेड, व्हाइट हेड और मुंहासे जैसी समस्या में बहुत आराम मिलता है।

दालचीनी शरीर के लिए अत्यधिक लाभदायक होती है। क्लीक करके पढ़ें – दालचीनी क्यों है सर्व श्रेष्ठ मसाला।

एप्पल सिडार सिरका और पुदीना पत्ती

एप्पल सिडार विनेगर और पिसी हुई पुदीना पत्ती को मिलाकर स्किन टोनर बनाया जा सकता है। इसे लगाने से ब्लैक हेड कम हो जाते है।

एप्पल सिडार विनेगर से रोम छिद्र में फंसा हुआ मैल नरम पड़ जाता है। और पुदीना से स्किन टाइट होती है तथा यदि दर्द या जलन हो रही

हो तो उसमे राहत मिलती है। इसके लिए 3 चम्मच ताजा पुदीना की पिसी हुई पत्तियां और पांच चम्मच सिरका मिलाकर एक काँच के बाउल

में सप्ताह भर के लिए रख दें। सात दिन के बाद इसे निथार कर इसमें एक कप पानी मिला दें। इसे एक बोतल में भर कर रख लें। रात को

सोते समय चेहरे को पानी से साफ करके कॉटन बॉल की मदद से इसे लगा लें। सुबह पानी से धो लें। मोइस्चराईजर लगा लें। कुछ ही दिनों

में आपको अलग ही फर्क महसूस होने लगेगा।

शक्कर

शक्कर को बादाम के तेल या नारियल के तेल में मिलाकर बहुत हल्के हाथ से मालिश करने से रोम छिद्र साफ हो जाते है। डेड स्किन निकल

जाती है। इससे त्वचा के रक्त संचार में वृद्धि होती है। स्किन सॉफ्ट हो जाती है तथा ग्लो आ जाता है। इसके लिए सादा पानी से चेहरा धो लें।

पोंछे नहीं, गीला रहने दें । अब आधा चम्मच शक्कर और आधा चम्मच तेल को अच्छे से मिलाकर हल्के हाथ से पोरुओं की मदद से पांच मिनट

तक गोलाकार में मालिश करें। अब पानी से धो लें। मोइस्चराईजर लगा लें। यह प्रयोग सप्ताह में दो या तीन बार ही करें अन्यथा त्वचा रूखी

हो सकती है। शक्कर के दाने बहुत खुरदरे नहीं होने चाहिये। बहुत हल्के हाथ से मालिश होनी चहिये।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा में कुछ बूँद पानी की डालकर पेस्ट बना लें। इससे सिर्फ ब्लैक हेड वाली जगह पर हल्के हाथ से मालिश करें। अब गुनगुने पानी से

धो लें। इससे ब्लैक हेड मिट जाते है और स्किन में ग्लो आ जाता है। बेकिंग सोडा को दही में मिलाकर पूरे चेहरे पर भी लगाया जा सकता है।

इसके लिए एक चम्मच दही में चौथाई चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर चेहरे पर लगा लें। दस मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे चेहरे पर

एक अलग ही ग्लो आ जाता है तथा ब्लैक हेड से मुक्ति मिलती है।

पसीना

पसीना आने से फायदा है और इससे नुकसान भी हो सकता है। पसीना आने से रोम छिद्र की सफाई हो जाती है लेकिन यदि पानी से धोकर

सफाई नहीं की जाये तो पसीना जम कर नुकसान पैदा कर सकता है। अतः पसीना आने के तुरंत बाद चेहरे को धोना ब्लैक हेड मिटाने में मदद

गार हो सकता है।

ब्लैक हेड स्ट्रिप्स

बाजार में मिलने वाली ब्लैक हेड स्ट्रिप कपड़े पर चिपकने वाला पदार्थ लगा कर बनाई गई होती है। जब इसे त्वचा पर लगा कर उतारते है तो

साथ में ब्लैक हेड इससे चिपक कर बाहर आ जाते है। इससे ब्लैक हेड होना नहीं मिटते, सिर्फ जो हो गए है उन्हें खींचकर बाहर निकालने का

यह एक जरिया है। इन बाजार में मिलने वाली ब्लैक हेड स्ट्रिप की जगह घर पर ही इसके कई विकल्प मिल सकते है।
होंठ फटने से सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नष्ट नहीं होती है बल्कि खाने पीने में और बातचीत करने में भी परेशानी होने लगती है। ज्यादातर सर्दी

के मौसम में यह परेशानी बढ़ जाती है। बार बार जीभ से होंठ गीला करने की इच्छा होती है पर ऐसा करने से कुछ मिनटों के लिए ठीक लगता

है फिर परेशानी होने लगती है। होंठ फटने के कई कारण हो सकते है। कुछ सामान्य कारण ( Hoth fatne ke ) इस प्रकार है:



होठ चाटना, चबाना या काटना


होठ जब भी थोड़े सूखे महसूस होते है तो उन्हें चाट कर गीला करने की इच्छा होने लगती है। होठों पर जीभ फिराने के कुछ मिनट बाद ही

वापस होठ सूखे महसूस होने लगते है। फिर उन्हें नम करने की इच्छा होती है। फिर से ऐसा करना पड़ता है और यह लगातार चलता रहता है।

परंतु इससे समस्या कम नहीं होती बल्कि ज्यादा बढ़ जाती है। इससे होठ ज्यादा सूखने लगते है।.
होठो पर एक सूखी परत सी बन जाती है। इस परत को कुछ लोग दांत से काट कर निकलने की कोशिश करने लगते है। कुछ लोगों की

आदत होती है वे बार बार होठो को दांतों से हल्का हल्का चबाते रहते है। ये सभी हरकतें होठो के लिए नुकसान देह होती है।

होंठ के ऊपर जीभ फिराने से लार की एक परत बन जाती है। लार में एमिलेज़ और माल्टीज़ नामक पाचक एंजाइम होते है।
ये एंजाइम होठो की पतली और नाजुक परत को नुकसान पहुंचाते है। जहाँ सामान्य त्वचा sixteen परतों से बनी होती है वहीं होंठ की त्वचा में

सिर्फ four -5 परत ही होती है। होठों की परत के पतली होने के कारण ही होठो का रंग गुलाबी दिखाई देता है जो असल में नीचे की परत में

मौजूद रक्त से भरी केशिकाओं के कारण दिखाई देता है। लार में मौजूद बेक्टिरिया जो वैसे तो नुकसानदेह नहीं होते लेकिन ये होठों को

नाजुक और पतली परत के कारण नुकसान पहुंचा सकते है । अतः यदि होंठ चबाने, चाटने या काटने की बुरी आदत हो तो इसे तुरंत छोड़

देना चाहिए।

होठो का बचाव नहीं करना

होठो का तेज हवा से और धूप से बचाव बहुत जरुरी होता है। कई बार चेहरे पर तो सनस्क्रीन या लोशन आदि लगा लिए जाते है, लेकिन होठों

पर कुछ नहीं लगाया जाता। होठों पर ना तो सिबेशस ग्रंथियां होती है, और ना ही हेयर फॉलीकल होते है । इस वजह से सामान्य त्वचा की

तरह इनको नमी नहीं मिल पाती। इसके अलावा होठो की त्वचा में दूसरी त्वचा की तरह मेलेनिन भी नहीं होता, जिस पर त्वचा का रंग निर्भर

करता है। मेलेनिन त्वचा को धूप की हानिकारक अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से बचाता है। होठों पर मेलेनिन नहीं होने के कारण यहाँ की त्वचा के

अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से नुकसान की अधिक संभावना होती है। अतः जरुरत के अनुसार होठों का बचाव किया जाना जरुरी होता है।
रूखी ( Dried out ) हवा में इसका ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दी में मौसम में हवा रूखी ( Dried out ) होने के कारण होठ ज्यादा फटते है। कमरे में

चलने वाले हीटर से भी हवा रूखी हो जाती है जो होंठ फटने का कारण बन सकता है। ऐसे में बचाव नहीं किये जाने से होठ फट जाते है।

अतः लिप बाम, वैसलीन, सरसों के तेल, मलाई, घी आदि का उपयोग होठो पर लगाने के लिए करना चाहिए। इससे होठ मुलायम बने रहते

है, फटते नहीं है।

मुंह से साँस लेना

मुंह से साँस लेना कभी मजबूरी होती है तो कभी आदत। जुकाम लगने पर नाक बंद हो जाती है ऐसे में मुंह से सांस लेने में आती है। छोटे बच्चों

के साथ अक्सर ऐसा होता है। इसके अलावा जो लोग खर्राटे ज्यादा लेते है उनका मुंह खुला रहता है और वे साँस मुंह से लेते है । बार बार साँस

की हवा का होठो पर से गुजरना होठो की नमी छीन लेता है और होठ सूख कर फटने लगते है। इसलिए ज्यादा खर्राटे लेने वाले लोगों के होठ

सूखे हुए रहते है। अतः ऐसी समस्याओं का इलाज जल्द कर लेना चाहिए। कभी कभी मुंह से साँस लेने की आदत सी हो जाती है इसे तुरंत छोड़ना चाहिए।
कुछ विशेष तत्व


टूथपेस्ट में ऐसे तत्व हो सकते है जो होठो में सूखापन ला सकते है। यदि आपको ऐसा महसूस हो तो टूथपेस्ट बदल लेना चाहिए। इसके अलावा

और भी कोई उत्पाद ऐसा हो जिसे काम में लेने पर होठों में सूखापन लगे तो उसे बदलना चाहिए। खट्टे फल का एसिड होठो को सुखा सकता

है। टमाटर की सॉस, च्युइंग गम, कैंडी आदि में इस्तेमाल होने वाले सिनेमेट्स भी ऐसे तत्व हो सकते है जो होठों के सूखेपन के लिए जिम्मेदार

हो सकते है।

पानी की कमी

यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो इसका असर होठों पर तुरंत नजर आता है। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर होंठ सुख जाते है। ऐसे

में हवा से या धूप से होठों का सूखापन और बढ़ सकता है। गर्मी के मौसम में पानी कम पीने के कारण होठ सूख कर फट सकते है। अतः पानी

पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।



विटामिन बी व आयरन की कमी


विटामिन बी की कमी के कारण होठ सूखने की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा होठ फटने का कारण आयरन या फोलेट की

कमी भी हो सकता है। रक्त की जाँच से कमी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेने पर ये ठीक हो सकते है। अक्सर होठो के

किनारे फटने का कारण आयरन की कमी होता है जिसका अंदाज नहीं लग पाता, इसलिए रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा अवश्य चेक

करवा लेनी चाहिए।

एलर्जी

कभी कभी मल्टी विटामिन के कुछ तत्व की एलर्जी के कारण होंठ सूखने की परेशानी पैदा हो सकती है। लिपस्टिक के कुछ तत्व एलर्जी पैदा

कर सकते है। इसी तरह खाने पीने के किसी विशेष वस्तु से या खाने में डाले जाने वाले रंग से एलर्जी के कारण होंठ सूख सकते है। ऐसे में

इनका प्रयोग नहीं करना ही उचित होता है। यदि समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बीमारी और दवाएं

थायराइड, सिरोसिस, डायबिटीज आदि बीमारियों के होने से होंठ फटने की समस्या हो सकती है। कुछ अन्य बीमारी के कारण भी होंठ

फटना या उनमे जलन सूजन आदि हो सकते है। कभी कभी कुछ दवाएं जैसे झुर्रियों या एक्ने, ब्लड प्रेशर आदि की दवा के कारण भी होंठ

सूख कर फटने लगते है । यदि लंबे समय तक इस प्रकार की परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए।

होंठ के किनारे फटना या चिरना

होठो का किनारे ( जहाँ दोनों होंठ जुड़ते है ) की तरफ से कटना, किनारे से चिरना या होठों के किनारे पर सूजन या जलन आदि होना फंगल

इन्फेक्शन या बेक्टिरिया आदि के कारण हो सकता है। ये बेक्टिरिया या फंगस लार में मौजूद होते है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यदि मजबूत

होती है तो इनसे कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने तथा मुंह पर चोट या खरोंच आने से या ज्यादा लार या थूक

किनारे पर इकठ्ठा होने से ये बेक्टिरिया तेजी से बढ़ने लगते है । इस वजह से वहाँ संक्रमण दिखाई देता है। प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का

कारण बीमारी या तनाव की स्थिति हो सकती है।
इसके अलावा होठों पर बेक्टिरिया के संक्रमण होने के और भी कई कारण हो सकते है जैसे गंदे हाथ होठों पर फेरना, पेन पेंसिल या नाख़ून

चबाना, खाना खाते समय या सोते समय ज्यादा लार निकलना। होठों पर ख़राब गुणवत्ता के बाम, लिपस्टिक, लिप ग्लॉस आदि लगाना।

खून की कमी होने पर भी होठों के किनारे फटने लगते है, रक्त की जाँच करवाने से इसका पता चलता है।



फटे होंठ के कारण जलन सूजन आदि हो सकते है। यदि होंठ लंबे समय तक फटे रहें या किनारों पर जलन सूजन या बहुत अधिक दर्द या

एलर्जी जैसा दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या चुम्बन होंठ फटने का कारण हो सकता है

मुंह में मौजूद नुकसान नहीं करने वाले बेक्टिरिया भी होठों को नुकसान पहुंचा सकते है । लार में मौजूद पाचक एंजाइम जैसे एमिलेज़ और

माल्टीज़ होठों की पतली परत को ख़राब करते है। जब भी होंठो पर लार की परत बनती है, होठो को नुकसान होता है। चुम्बन ( hug ) के

समय होठों पर लार की परत बनती ही है। कुछ माता पिता छोटे बच्चों को प्यार जताने के लिए उन्हें होठो पर चुंबन देते है। इससे नुकसान हो

सकता है। चुम्बन से पहले अक्सर होठों पर जीभ फेरकर उन्हें नम बनाया जाता है। छोटे से चुम्बन के समय भी लार होंठ पर आ ही जाती है।

और पुरुष महिला के आवेशपूर्ण कामुक चुम्बन के समय तो होंठ लार से भर जाते है। इससे बहुत नुकसान हो सकता है।

हालाँकि कुछ विशेषज्ञ चुम्बन के अनेक फायदे भी बताते है।

होंठ फटने पर घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe With regard to Mouth

— सुबह तथा रात को सोते समय नाभि को साफ करके उसमे गुनगुना सरसों का तेल लगाने से होंठ मुलायम होते है और फटने बंद हो

जाते है।

— सर्दी के कारण फटे होंठ ठीक करने के लिए दूध की मलाई में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम हल्के हाथ से थोड़ी मालिश

होठो का फटना मिट जाता है।

— बादाम का तेल रोजाना सुबह शाम होठो पर लगाने से होंठ फटना ठीक होता है।

— होंठ काले और सूखे हो गए हों तो गुलाब के फूल की ताजा पत्तियां पीस कर इसमें ग्लिसरीन मिला लें। लिपस्टिक का उपयोग बंद करके

इसे नियमित रूप से होठो पर लगाने से होंठ सुन्दर गुलाबी हो जाते है।

— छाछ से निकले मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ गुलाबी और मुलायम होते है।

— घी में जरा सा नमक मिलाकर सुबह शाम होठो पर और नाभि में लगाने से होंठ फटना बंद होता है।

— सरसो के तेल में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम होठों पर और नाभि में लगाने से होंठ फटने बंद होते है।.

टोन्सिल की परेशानी दूर करने के उपाय

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