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Wednesday, 17 May 2017

फेस स्क्रब से लायें चेहरे पर चमक

फेस स्क्रब सौन्दर्य वृद्धि का वह तरीका है जिसमे फेस स्किन की डेड सेल्स हटाई जाती है और नई त्वचा को उभारा जाता है। इससे

फेस स्किन में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। स्किन में एक नयी जान आ जाती है। फेस स्किन लंबे समय तक सुन्दर और जवां बनी रहती है।

फेस स्क्रबर में कई प्रकार के स्किन के लिए फायदेमंद चीजें मिलाई जाती है। इस वजह से स्किन को पोषण मिलता है। इससे स्किन की

प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है जिससे मुँहासे फुंसी आदि से बचाव होता है। बिना मेकअप के भी चेहरा हमेशा खिला खिला रहता है।
सुंदर, स्वस्थ और चमकीली त्वचा बिना मेकअप के भी सबके मन को भाती हैं। इसके लिए महँगे सौन्दर्य प्रसाधन की जरूरत नहीं होती है।

घर पर ही थोड़ी सी नियमित देखभाल जैसे फेस स्क्रब आदि के उपयोग से आसानी से आपका चेहरा सुंदर, कोमल और चमकीला नजर आ

सकता है।

जैसा की आप जानते है, चेहरे की देखभाल में क्लीन्सिंग, स्किन टोनिंग और मॉश्चराइजिंग आदि की जरूरत होती है। परन्तु ये सब करने के

बाद भी चेहरे पर डेड सेल्स हटाने बहुत जरुरी होते है। अन्यथा तेज़ धूप, सफ़र, थकान, आदि के कारण चेहरा मुरझा जाता है।सुंदर, स्वस्थ और चमकीली त्वचा बिना मेकअप के भी सबके मन को भाती हैं। इसके लिए महँगे सौन्दर्य प्रसाधन की जरूरत नहीं होती है।

घर पर ही थोड़ी सी नियमित देखभाल जैसे फेस स्क्रब आदि के उपयोग से आसानी से आपका चेहरा सुंदर, कोमल और चमकीला नजर आ

सकता है।

जैसा की आप जानते है, चेहरे की देखभाल में क्लीन्सिंग, स्किन टोनिंग और मॉश्चराइजिंग आदि की जरूरत होती है। परन्तु ये सब करने के

बाद भी चेहरे पर डेड सेल्स हटाने बहुत जरुरी होते है। अन्यथा तेज़ धूप, सफ़र, थकान, आदि के कारण चेहरा मुरझा जाता है।
इसके अलावा ब्लैक हेड, वाइट हेड जैसी समस्याओ का सामना भी करना पड़ सकता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए फेस

स्क्रबर की जरूरत होती है जो घरेलु सामान से आसानी से किया जा सकता है। नीचे इनके बारे में डिटेल में बताया गया है।

घर पर ही आपको ब्यूटी निखारने के अच्छे साधन प्राप्त हो सकते है जो इसी वेब साईट बताये गए है । इन्हें भी जरूर आजमा कर देखें।

ब्यूटी निखारने के घरेलू साधन Gharelu Nuskhe with regard to elegance के लिए क्लीक करें और इन्हें जानें:

होम मेड स्किन टोनर से निखारें चेहरा

हर्बल मेनिक्योर, फ्रूट मेनिक्योर, चॉकलेट मेनिक्योर के तरीके

हेयर स्पा घर पर कैसे करें

हेयर मास्क कैसे बनाये

मेनिक्योर घर पर कैसे करें

फेस स्क्रब कैसे करें – How you can Wash Encounter Pores and skin


नीचे दिए गए फेस स्क्रब में से अपनी स्किन के हिसाब से चुन कर फेस स्क्रब बना लें।


स्क्रब का उपयोग करने से पहले चेहरे को साफ पानी से अच्छे से धो ले।


स्क्रब को चेहरे पर लगा कर नीचे बताये अनुसार कुछ वक्त लगा रहने दे।


हल्के हाथ से गोल गोल मसाज करें। बहुत अधिक देर तक और अधिक दबा कर मसाज ना करें।


साफ पानी से अच्छे से धो ले।


धोने के बाद चेहरे को साफ और नर्म तौलिये से थपथपा कर सूखा लें।


घिस कर नहीं पोंछें।


चेहरे की स्किन बहुत नाजुक होती है अतः बहुत हल्के हाथ से ही मसाज करें।


कुछ स्क्रब चेहरे पर लगा कर रखे नहीं जाते चेहरे पर मसाज के बाद तुरंत धो दिए जाते है। उन्हें उसी प्रकार यूज़ करें।


फेस स्क्रब कितने दिन में करें – Encounter Wash Kitne Din Me personally Kare


शुरुआत में एक सप्ताह तक फेस स्क्रब का उपयोग एक दिन छोड़ कर करे (alternate day time ) ।


अगले सप्ताह दो दिन छोड़कर करें।


इसके बाद सप्ताह में एक बार (weekly ) फेस स्क्रब करें।


सप्ताह में एक बार फेस स्क्रब हमेशा किया जा सकता है।


कुछ फेस स्क्रब जैसे जेल स्क्रब रोजाना भी किये जा सकते है। इनमे कोई खुरदरी वस्तु नहीं होती।


फेस स्क्रब करते समय सावधानी – Be cautious


— कोई भी स्क्रबर बहुत अधिक खुरदरा न हो अन्यथा स्किन पर जलन हो सकती है या स्किन पर स्क्रेच पड़ सकते है।
— फेस स्क्रबर पुराना नहीं होना चाहिए।

— स्क्रब बनाते समय ध्यान रखें यह बहुत अधिक गाढा या पतला नहीं हो एक लेप ( Insert ) की तरह होना चाहिए। गाढ़ापन कम करने के

लिए गुलाब जल का भी उपयोग किया जा सकता है ।

— यदि फेस पर चोट या कट आदि हो या बड़े पिम्पल्स हो तो फेस स्क्रब ना लगाएं ।

— फेस स्क्रब को धोने के बाद चेहरा साफ और नर्म तौलिये से थपथपा कर सुखाएं। घिस कर कदापि नहीं पोंछें।

— स्क्रबर के उपयोग से नई मुलायम स्किन बाहर आती है इसलिए स्क्रब करने के तुरंत बाद तेज धूप मे न जाए, हो सके तो स्क्रब का

उपयोग रात को करे।

— वैसे तो नीचे दिए गए फेस स्क्रब के सभी सामान घरेलु है। जिनसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। फिर भी यदि आपको फेस स्क्रब की किसी भी सामग्री एलर्जी हो तो वह यूज़ ना करें। आपको जिस तरह का स्क्रब सूट करता हो वही लगाएं।
विभिन्न प्रकार के फेस स्क्रब बनाकर यूज़ करने के तरीके
बादाम का पाउडर — 1 चम्मच

ओलिव आयल — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकतानुसार



बादाम पाउडर, ओलिव आयल को मिक्स करे अब इसमें दूध डालकर पेस्ट तैयार कर ले। चेहरा साफ पानी से धो कर यह पेस्ट लगाए। 5 -7

मिनिट बाद हलके हाथ से सरक्यूलर मोशन में चेहरे की मसाज करे व साफ पानी से चेहरा धो ले। चेहरा दमकने लगता है साधारण व ड्राई

स्किन के लिये बहुत अच्छा है।

चॉकलेट स्क्रब – Dark chocolate Wash

चॉकलेट पाउडर — डेढ़ चम्म्च

शहद — 1 /2 चम्मच

दही — 1 चम्मच

चॉकलेट पाउडर, शहद, और दही इन तीनो को मिलाकर पेस्ट बनायें। चेहरे पर लगाएं। दस मिनट बाद चेहरे पर हलके हाथ से मसाज

करें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे त्वचा मुलायम होती है, रूखापन दूर होता है, मृत कोशिकाएं दूर हटती है। असमय पड़ने वाली

झुर्रियों से बचाव होता है। तथा चेहरे को गोरा ( Reasonable Pores and skin ) बनाता है। यह ड्राई और झुर्रियों ( Facial lines ) वाली स्किन के लिए बेहतर

स्क्रब है।

एलो वेरा स्क्रब – Aloe Observara Wash
एलोवेरा पल्प — एक चम्मच

दही — एक चम्मच

एलो वेरा पल्प और दही मिलाकर पेस्ट बनायें। और चेहरे पर लगा लें। दस पंद्रह मिनट बाद हलके हाथ से मसाज करते हुए धो लें। इसमें एंटी

इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण सन बर्न से झुलसी त्वचा को ठंडक पहुँचाता है। त्वचा की रंगत सुधारता है। यह एक प्राकृतिक मोइश्चराइजर है।

यह जेल स्क्रब होने के कारण इसे रोजाना यूज़ किया जा सकता है।

सेंडल वुड स्क्रब – Sandal Wooden wash

चन्दन पाउडर — 1 /2 चम्मच

जौ का आटा — 1 चम्मच

दही — 1 चम्मच

चन्दन पाउडर, जौ का आटा और दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं व 5 -7 मिनिट बाद हलके हाथ से मसाज कर लें।

फिर गुनगुने पानी से धो ले। दाग धब्बे झाइयां मिटाता है। यह स्किन को ठंडक पहुँचाता है। एंटी बेक्टिरियल होता है। जिसके कारण मुँहासे

और फुंसी आदि को ठीक करता है। इस सप्ताह में दो बार लगा सकते है।

हनी स्क्रब – Sweetie Wash.
शहद — 1 /2 चम्मच

बेकिंग सोडा — 1 /4 चम्मच

दही — 1 चम्मच



शहद, बेकिंग सोडा और दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर 8 -10 मिनट लगा कर रखें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। इससे ब्लैक हेड

और व्हाइट हेड निकल जाते है व त्वचा की रंगत सुधरती है। इसे नार्मल और ऑइली स्किन पर यूज़ कर सकते है।

टोमेटो स्क्रब – Tomato Wash


टमाटर रस — two चम्मच

शक्कर — 1 चम्मच

मिल्क पाउडर — 1 /2 चम्मच

टमाटर का रस, शक्कर और मिल्क पाउडर को मिला कर पेस्ट बना लें। यदि गाढ़ा लगे तो इसमें गुलाब जल मिला लें। इस चेहरे पर लगाकर

बहुत हल्के हाथ से मसाज करें। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। यह खुरदरी और सनबर्न से झुलसी हुई फेस स्किन के लिए बहुत

कारगर स्क्रब है। ध्यान रहे शक्कर के दाने बहुत बड़े ना हो और मसाज भी बहुत हल्के हाथ से हो।

पपाया फ्रूट स्क्रब – Papaya Wash.
पपीता पल्प — two चम्मच

शहद — 1 चम्मच

चीनी — 1 चम्मच

पपीते का गूदा पीस लें, इसमें शहद और चीनी अच्छे से मिला लें। इसे चेहरे पर लगायें। 10 मिनट चेहरे पर लगा रहने दें। इसके बाद हल्के

हाथ से मसाज करें। अब गुनगुने पानी से धो लें। यह बहुत शानदार स्क्रब है। चेहरे की रंगत सुधरता है, दाग धब्बे मिटाता है, झुर्रियों से बचाता

है। सभी प्रकार की स्किन पर इसका जादुई प्रभाव देखने को मिलता है।

चिरोंजी स्क्रब – Charoli Wash.
चावल का आटा — 1 चम्मच

चिरोंजी पाउडर — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकता अनुसार



चावल का आटा, चिरोंजी पाउडर मिलाकर इसमें जरूरत के हिसाब से दूध डालकर पेस्ट बना लें। इसे दस मिनट के लिए चेहरे पर लगा कर

रखें। हल्के हाथ से मसाज करके साफ पानी से धो लें। बेजान त्वचा के लिए अच्छा स्क्रब है। इससे मृत कोशिका हट जाती है। चेहरे पर निखार

आ जाता है। त्वचा एकसार हो जाती है। ब्लैक हेड व्हाइट हेड मिट जाते है। यह स्क्रब हर प्रकार की स्किन के लिए उपयुक्त है।

हर्बल स्क्रब – Natural Wash


त्रिफला चूर्ण — 1 /2 चम्मच

मुल्तानी मिट्टी — 1 चम्मच

नारियल तेल — 1 /2 चम्मच

दूध — आवश्यकता अनुसार

त्रिफला चूर्ण एकदम बारीक पिसा हुआ या छना हुआ लें। इसमें मुल्तानी मिट्टी और नारियल का तेल मिला लें। अब आवश्यकता के अनुसार

दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 5 मिनट तक चेहरे पर लगा कर रखें। अब हल्के हाथ से मसाज करें। गुनगुने पानी से धो लें। इसमें स्किन के

लिए लाभदायक विटामिन और मिनरल होते है। इससे त्वचा को सम्पूर्ण पोषक तत्व प्राप्त होते है। सिकन साफ होकर चमकने लगती है।

त्वचा के सभी तरह के विकार समाप्त करता है। यह ऑयली स्किन के लिए अच्छा स्क्रब है।

नाख़ून स्वस्थ और सुन्दर बनाने के घरेलु उपाय

नाख़ून स्तनधारियों की पहचान है। यह कठोर पारदर्शी प्रोटीन केराटिन से बना होता है। बाल भी इसी प्रोटीन से बने होते है। यह प्रोटीन

मृत कोशिकाओं से बनता है। नाखुन का काम अँगुलियों को चोट आदि से बचाना होता है। यह सौन्दर्य बढ़ाने में भी योगदान देता है।

अँगुलियों के नाखुन एक महीने लगभग four मिलीमीटर तक बढ़ सकते है तथा पैर के नाखुन एक महीने में लगभग two मिलीमीटर बढ़ पाते है।
नाख़ून की सुंदरता व रख रखाव के कई व्यापार चल रहे है जैसे नेल पोलिश, नेल आर्ट, नेल क्रीम, क्यूटिकल क्रीम, मेनिक्योर आदि। नाखुन

के विभिन्न शेप देकर तथा नेल पोलिश, नेल आर्ट से सजा कर सौन्दर्य में वृद्धि की जा सकती है। नाखुन को मेनिक्योर से साफ व सुंदर रखा जा

सकता है। इसके लिए पार्लर में महँगे रासायनिक तत्वो के उपयोग के बजाय घर पर ही नियमित मेनिक्योर आदि करने से नाखुन को

नुकसान नहीं होता और परिणाम अच्छा मिलता है। देखें घर पर मेनिक्योर करने का तरीका

कृपया ध्यान दें: किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते है

नाख़ून कैसे बनता है

नाख़ून सिर्फ वह नहीं जो दिखाई देता है। जो दिखाई देता है वह नेल प्लेट कहलाता है। इसके नीचे नेल बेड होता है जो सामान्य त्वचा जैसाही होता है। नेल बेड के नीचे नेल मेट्रिक्स होता है। नेल मेट्रिक्स पर ही नाख़ून का बनना और उनका आकार निर्भर करता है। नेल मेट्रिक्स

को मिलने वाले पोषक तत्व ही नाख़ून के हेल्थी या कमजोर होने के लिए जिम्मेदार होते है।.

नाख़ून पर बुरा प्रभाव पड़ने के कारण

नाख़ून के बढ़ने तथा अच्छे होने या ना होने के अनेक कारण होते है। वातावरण के तापमान का भी नाख़ून पर प्रभाव पड़ सकता है।

सामान्यतया गर्मी के मौसम में नाख़ून व बाल जल्दी बढ़ते है और सर्दी में धीरे धीरे बढ़ते है। पोष्टिक भोजन की कमी, डिप्रेशन, किसी रोग

की वजह से या संक्रमण आदि होने के कारण भी नाखुन धीरे बढ़ते है तथा उनका लुक ख़राब हो सकता है।

पानी तथा दैनिक उपयोग के साफ सफाई के साधन जैसे साबुन या बर्तन धोने का लिक्विड आदि में हाथ ज्यादा समय रहने से नाखुन का

सौन्दर्य चला जाता है। किसी प्रकार की चोट या रगड़ आदि के लगने से नाखुन कट फट जाते है।

जहाँ नाख़ून और त्वचा मिलते है उस जगह को क्यूटिकल कहते है। ये क्यूटिकल संक्रमण होने से बचाते है, तथा बेक्टिरिया आदि को अंदर

प्रवेश नहीं होने देते। इसीलिए क्यूटिकल का भी ध्यान रखना चाहिए अन्यथा इनमे फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।
नाख़ून देखकर बीमारी का अंदाजा लगाएँ

नाखून का रंग, मोटाई या आकार में होने वाले परिवर्तन को किसी शारीरिक समस्या या रोग का संकेत समझा जाता है। किस परिवर्तन से

कौनसे रोग का अंदाजा लगाया जाता है इस बारे में यहाँ कुछ संकेत बताये जा रहे जो सतर्क होने के लिए जानकारी है। किसी भी नतीजे पर

पहुँचने के लिए चिकित्सक का परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

— नाखुन यदि पीले व फीके हो रहे है तो सम्भावना है कि आप कुपोषण, एनीमिया, लिवर प्रॉब्लम, पीलिया, फंगल इन्फेक्शन, मधुमेह,

थायरॉइड, सिरोसिस आदि में से किसी समस्या से ग्रस्त हों ।

— नाखुन सफ़ेद हो गए हों सिर्फ आगे एक बारीक लकीर गुलाबी रह गई हो तो यह हेपेटाइटिस जैसी लिवर समस्या को दर्शाता है।

— नाख़ून जल्दी जल्दी टूट रहे है ओर सूखे महसूस हो रहे है तो यह थायरॉइड का संकेत हो सकता है। या हो सकता है आप केमिकल ज्यादा

उपयोग में ले रहे है जैसे नेल पोलिश, साबुन या सर्फ।
— रूखे बेजान नाखुन विटामिन सी, फॉलिक एसिड, ह्रदय रोग या रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण हो सकते है।
— यदि नाखुन नीले पड़ रहे है तो ऑक्सीजन की कमी, निमोनिया, फेफड़ो में इन्फेक्शन हो सकता है।

— ज्यादा उभरे हुए नाखुन दर्शाते है, कि ऑक्सीजन का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो रहा या ऑतो या फेफड़ो में सूजन हो सकती है।

— यदि आपके नाखुन बीच में सा दबकर चम्मच जैसे हो गए है तो यह आयरन की कमी को दर्शाता है।

— नाख़ून पर बनने वाली लकीरें प्रोटीन की कमी के कारण हो सकती हैं।

— नाखुन में सफेद लाइन व सफेद धब्बे लिवर या ह्रदय रोग की और संकेत हो सकता है।

नाख़ून आकर्षक और स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएँ

यदि आप स्वस्थ है और पोष्टिक भोजन ले रहें है तो नाख़ून खूबसूरत, गुलाबी और चमकीले नजर आएंगे।

हरी पत्तेदार सब्जियों से विटामिन ए, सी, इ, के और बी कॉम्प्लेक्स मिलते है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नेशियम और पोटेशियम के

ये अच्छे स्रोत होते है। इनमे बायोटिन, आयरन प्रोटीन भी मिलते है। इन सबसे नाख़ून आकर्षक और मजबूत होते है। अतः हरी पत्तेदार

सब्जियों को अपने आहार में पर्याप्त स्थान दें।

दूध, दही, अंकुरित अनाज से कैल्शियम तथा कई प्रकार के नाख़ून के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते है। इनका उपयोग करें।

इसके अलावा सूखे मेवे जैसे बादाम, अख़रोट, किशमिश और फल जैसे आम, अनार, केला, संतरा, आँवला आदि का भरपूर उपयोग करें।

शकरकंद, गाजर, कददू आदि में विटामिन ए, प्रोटीन, बायोटिन तथा ओमेगा -3 फैटी एसिड होने की वजह से नाख़ून के लिए ये बेहतर

पोष्टिक भोजन साबित होते है। इन्हें अवश्य लें।

नाख़ून मजबूत, चमकीले करने तथा बढ़ाने के घरेलु नुस्खे

— कमजोर व पीले नाख़ून के लिए रुई के फाहे से नींबू का रस लगाए या नींबू का छिलका रगड़े थोड़ी देर बाद साफ पानी से हाथ धो ले,

कुछ ही दिन में नाख़ूनो में कुदरती चमक व मजबूती आ जायेगी।

— नाख़ून के आस पास की क्यूटिकल व त्वचा कड़क गई हो, पक गई हो या कोई संक्रमण हो गया तो नींबू के हरे पत्ते पीस कर थोड़ा सा

नमक मिलाकर लगाए पंद्रह दिन में ही फर्क पड़ जाएगा।

— नाख़ून सख्त दिखते हुए भी ऑक्सीजन लेते है जो नेल बेड तक पहुँचती है। अतः लगातार नाख़ून पर नेल पोलिश लगाकर रखने से और

बार बार केमिकल से नेल पोलिश साफ करने से नाख़ून कमजोर और फीके हो जाते है।

— नाखुनो को गुनगुने पानी में पाँच मिनट डुबोने के बाद गुनगुने जैतून के तेल से हल्की मालिश करे।

— नाखुन कटना फटना, बदरंग होना, मोटे होना आदि समस्या के छुटकारे के लिए 100 ग्राम चुकन्दर का रस रोज पिएँ।

— आयरन, विटामिन डी व कैल्शियम की पूर्ति के चुकुन्दर का सलाद नियमित रूप से लें ।

— गर्म पानी में नमक मिलाकर 10 मिनट तक रोजाना एक महीने तक सेक करने से नाखुन बढ़ने लगते है।

— नाखुन टूटे, फटे या त्वचा से अलग हो रहे हो तो सरसो के गुनगुने तेल में दस मिनट के लिए डुबो कर रखे व बाद मे हल्के हाथ से मालिश

करे।

— नाख़ून पर लहसुन की कली को थोड़ा पीस कर कुछ देर घिसे कुछ दिनों मे ही नाख़ून बढ़ने लगेंगे।

— नाखुनो का रुखापन दूर करने के लिए मक्खन या पेट्रोलियम जेली से मालिश करे।

— नाखूनो का फीकापन दूर करने के 10 ग्राम काली किशमिश को धोकर एक कप पानी में रात को भिगोकर सुबह किशमिश को अच्छी

तरह चबा चबाकर खाये व कप वाला पानी पी ले। एक महीने तक इसका प्रयोग करने पर नाखून के साथ त्वचा की रंगत में भी फर्क अवश्य

पाएंगे।

— हाथो की नमी बनाये रखने के लिए मॉइश्चराजर या नारियल का तेल नियमित रूप से लगाना चाहिए।

— डार्क कलर की नेलपोलिश लगाने से पहले प्राइमर कोट अवश्य लगाए।

— नेल रिमूवर से घिस कर नेल पेंट साफ नहीं करना चाहिए। एक रुई के फाहे में नेल रिमूवर लेकर नाख़ून पर रखे व हल्के हाथ से नेल

पॉलिश साफ करे।

— घर के काम विशेष कर बर्तन साफ करने के लिए दस्तानो का इस्तेमाल करे।

— नाखुनो का प्रयोग किसी भी जगह को खुरचने में या डिब्बे आदि को खोलने के लिए न करे।

— पैर के नाख़ून ख़राब होने से बचाने के लिए सूती मोज़े ही पहनें। गीले व टाइट जूते चप्पल नहीं पहनें।.

ब्लैक हेड मिटाने के उपाय

ब्लैक हेड की परेशानी लगभग सभी को होती है। विशेष कर यौवन काल में प्रवेश करते समय। चेहरे पर छोटे छोटे काले दाने नजर आते है।

छूने पर कड़क महसूस होते है। हल्का सा कुचरने से एक दाना सा निकलता है जो अंदर से मटमैले रंग का होता है। इसके निकलने पर हल्का

सा दर्द भी महसूस हो सकता है। यही ब्लैक हेड होता है। इसका बाहर नजर आने वाला हिस्सा काले रंग का होता है। इसलिए इसे ब्लैक हेड

कहते है। इसकी वजह से चेहरे की सुंदरता निखर नहीं पाती और शर्मिंदगी महसूस होती है।.

ब्लैक हेड क्यों हो जाते हैं

हमारी त्वचा और बालों को रूखेपन से बचाने के लिए रोम छिद्र में सीबेशस ग्रंथिया होती है। इन ग्रंथियों से सीबम नामक तेलीय पदार्थ

निकलता है जो हमारे शरीर पर मौजूद बाल और त्वचा को मोइश्चर देने का काम करता है। इससे त्वचा कोमल, नम बनी रहती है और ग्लो

बना रहता है । यह सीबम फैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लिसराइड्स आदि अवयवों से बना होता है। सीबम से त्वचा की रक्षा होती है। जब

यह सीबम अधिक मात्रा में बनता है और रोम छिद्र बड़ा होता है तो यह त्वचा के रोम छिद्र में इकठ्ठा हो कर त्वचा की मृत कोशिका के साथ

मिलकर कई प्रकार की परेशानी पैदा कर देता है।
जब यह सीबम त्वचा के बाहर निकलता है तो ऑक्सिडेशन के कारण यह काला पड़ जाता है। जो ब्लैक हेड के रूप में नजर आता है।

यदि यह रोम छिद्र बारीक़ होने के कारण त्वचा के बाहर नहीं निकलता अंदर ही इकठ्ठा हो जाता है तब यह व्हाइट हेड के रूप में नजर

आता है।
कुछ लोग गन्दगी को ब्लैक हेड बनने का कारण समझते है। फिर त्वचा को बार बार धोते है और घिस कर साफ करते है। ऐसा बिल्कुल नहीं

करना चाहिए। इससे त्वचा रूखी हो जाती है और रूखेपन को मिटाने के लिए सीबम का स्राव और बढ़ हो जाता है। इससे परिस्थिति सुधरने

के बजाय बिगड़ती है। इन्फेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

ब्लैक हेड चेहरे पर अधिक होते है। इसके अलावा गर्दन और छाती पर भी हो सकते है। क्योकि चेहरे, गर्दन और छाती पर रोम छिद्र तथा

सीबेशस ग्रन्थियां दूसरी जगह की अपेक्षा कई गुना अधिक होते हैं।

ब्लैक हेड होने के मुख्य कारण –

— जैसा की ऊपर बताया गया है सीबम का स्राव बढ़ने के कारण ब्लैक हेड हो जाते है। सीबम का स्राव बढ़ने का एक कारण यौवनकाल में

प्रवेश के समय हार्मोन का बदलाव होता है। इस समय सीबम का स्राव अधिक मात्रा में होने के अलावा त्वचा की कोशिकाओं के बनने और
मिटने की गति भी बढ़ जाती है । इस वजह से ब्लैक हेड, व्हाइट हेड, मुहांसे आदि अधिक होते है। यह परेशानी यौवनकाल में प्रवेश करते

समय लड़के और लड़की दोनों को हो सकती है।

— कभी कभी कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में या मासिक धर्म के समय भी यह समस्या बढ़ सकती है।

— अधिक मात्रा में कॉस्मेटिक्स का यूज़ ब्लैक हेड बनने का कारण बन सकता है।

— अधिक पसीना या अधिक नमी के कारण ब्लैक हेड बन सकते है ।

— किसी बीमारी या किसी दवा के कारण कोशिकाओं बनने व मिटने की गति में परिवर्तन हो सकता है। इससे ब्लैक हेड बनने लगते है।

ब्लैक हेड इस कारणों से नहीं होते है:

— चेहरे को बार बार नहीं धोना – कुछ लोग सोचते है कि चेहरा बार बार नहीं धोते है, इसलिए ब्लैक हेड हो जाते है लेकिन यह सही नहीं है।

बल्कि बार बार चेहरा धोने या घिस कर धोने से स्थिति बिगड़ सकती है। इससे त्वचा रूखी हो जाती है और इसे मिटाने के लिए सीबम का स्राव
बढ़ जाता है। इससे ब्लैक हेड बढ़ भी सकते है। इन्फेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की चेहरे की

सफाई का ध्यान ना रखें ।

— चॉकलेट या मेवे खाने से ब्लैक हेड अधिक नहीं होते है। कुछ लोग मानते है की इन्हें खाने से ब्लैक हेड होते है।

— हस्त मैथुन या सहवास – यह आम भ्रान्ति है की सहवास करने से या हस्तमैथुन करने से ब्लेक हेड या मुहांसे आदि हो जाते है। जैसा की

ऊपर बताया गया है इसके लिए सीबम का अधिक स्राव मुख्य कारण होता है। यौवन काल में यह स्राव अधिक होने के कारण ऐसा भ्रम पैदा

हो जाता है कि इसका कारण हस्त मैथुन हो सकता है। परंतु यह सही नहीं है।

ब्लैक हेड मिटाने के घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe With regard to Dark Mind

ब्लैक हेड मिटाने के लिए त्वचा रूखी भी नहीं रहनी चाहिए और अधिक मात्रा में कॉस्मेटिक का यूज़ भी नहीं होना चाहिये। मोइश्चराइजर बिना

तेल वाला काम में लेना चाहिए। डेड स्किन सेल्स लगातार त्वचा पर से हटाये जाने चाहिए। क्योकि ब्लैक हेड बनने में ये मदद करते है। इसके

अलावा त्वचा में कसावट लायी जानी चाहिए। इस सब के लिए कुछ घरेलु उपाय नीचे बताये गए है इन्हें नियमित काम में लेने से ब्लैक हेड से

छुटकारा मिल जाता है।

मुल्तानी मिटटी

मुल्तानी मिटटी रोम छिद्र से तेलीय पदार्थ तथा मेल आदि को सोख कर उसे साफ कर देती है। जब मुल्तानी मिट्टी का लेप चेहरे पर लगते है

तो मिट्टी में मौजूद लाभदायक तत्व त्वचा को मिलते है। साथ ही मिट्टी ब्लैक हेड को बाहर निकाल देती है। इस लेप से त्वचा में रक्त संचार भी

बढ़ता है जो त्वचा को सुंदर बनाता है।

मुल्तानी मिट्टी का लेप बनाने के लिए इसमें पानी, गुलाब जल, एप्पल सिडार विनेगर, दूध, दही, एलोवेरा जेल आदि में से कुछ भी मिलाया

जा सकता है। आप अपनी पसंद के हिसाब से या जो भी उपलब्ध हो, मुल्तानी मिट्टी का लेप उपरोक्त में से मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को

लगाने के बाद दस पंद्रह मिनट तक लगाये रखें। सूखने के बाद पानी से धो लें। इसके बाद हल्का सा मोइस्चराईजर लगा लेना चाहिए। एक दो

बार लेप लगाने से आपको अंदाज हो जाता है की आपको किस प्रकार का लेप सूट करता है, जिसके रिजल्ट ज्यादा अच्छे मिलते है।
दूध-शहद
दूध और शहद दोनों त्वचा के लिए बहुत फायदेंमंद होते है। शहद में एंटी बेक्टिरियल गुण होते है तथा दूध से त्वचा मुलायम और लचीली बनती

है। ब्लैक हेड हटाने के लिए एक चम्मच शहद और एक चम्मच दूध मिलाकर हल्का सा गुनगुना कर लें। अब अच्छे से मिलाकर सही तापमान

होने पर एक पतली परत ब्लैक हेड वाली जगह पर लगा लें। इसके ऊपर रुई की एक पतली परत दबाकर चिपका दें। बीस मिनट सूखने दें।

इसके बाद ध्यान से रुई की परत को निकाल दें। अब ठन्डे पानी से धो लें और मोइस्चराईजर लगा लें। इसे कुछ दिन नियमित करने से ब्लैक

हेड निकल जाते है तथा नए ब्लैक हेड नहीं बनते।

दालचीनी-शहद
शहद और दालचीनी दोनों में एंटी बेक्टिरिया तत्व होते है। इसलिए यह ब्लैक हेड मिटाने में बहुत कारगर साबित होता है। दालचीनी रक्त

संचार बढ़ाती है। जिसके कारण त्वचा कोमल और चमकदार बनती है। इसके लिए एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच बारीक दालचीनी

पाउडर मिलाकर एक पतली परत ब्लैक हेड वाली जगह पर लगा लें। इसके ऊपर रुई की एक पतली परत दबा कर लगा दें। दस पंद्रह मिनट

के बाद इसे ध्यान पूर्वक निकाल दें। अब धो लें और मोइस्चराईजर लगा लें। दालचीनी का उपयोग मसाले की तरह खाने पीने के सामान में भी

करना चाहिए। इससे कुछ ही समय में ब्लैक हेड, व्हाइट हेड और मुंहासे जैसी समस्या में बहुत आराम मिलता है।

दालचीनी शरीर के लिए अत्यधिक लाभदायक होती है। क्लीक करके पढ़ें – दालचीनी क्यों है सर्व श्रेष्ठ मसाला।

एप्पल सिडार सिरका और पुदीना पत्ती

एप्पल सिडार विनेगर और पिसी हुई पुदीना पत्ती को मिलाकर स्किन टोनर बनाया जा सकता है। इसे लगाने से ब्लैक हेड कम हो जाते है।

एप्पल सिडार विनेगर से रोम छिद्र में फंसा हुआ मैल नरम पड़ जाता है। और पुदीना से स्किन टाइट होती है तथा यदि दर्द या जलन हो रही

हो तो उसमे राहत मिलती है। इसके लिए 3 चम्मच ताजा पुदीना की पिसी हुई पत्तियां और पांच चम्मच सिरका मिलाकर एक काँच के बाउल

में सप्ताह भर के लिए रख दें। सात दिन के बाद इसे निथार कर इसमें एक कप पानी मिला दें। इसे एक बोतल में भर कर रख लें। रात को

सोते समय चेहरे को पानी से साफ करके कॉटन बॉल की मदद से इसे लगा लें। सुबह पानी से धो लें। मोइस्चराईजर लगा लें। कुछ ही दिनों

में आपको अलग ही फर्क महसूस होने लगेगा।

शक्कर

शक्कर को बादाम के तेल या नारियल के तेल में मिलाकर बहुत हल्के हाथ से मालिश करने से रोम छिद्र साफ हो जाते है। डेड स्किन निकल

जाती है। इससे त्वचा के रक्त संचार में वृद्धि होती है। स्किन सॉफ्ट हो जाती है तथा ग्लो आ जाता है। इसके लिए सादा पानी से चेहरा धो लें।

पोंछे नहीं, गीला रहने दें । अब आधा चम्मच शक्कर और आधा चम्मच तेल को अच्छे से मिलाकर हल्के हाथ से पोरुओं की मदद से पांच मिनट

तक गोलाकार में मालिश करें। अब पानी से धो लें। मोइस्चराईजर लगा लें। यह प्रयोग सप्ताह में दो या तीन बार ही करें अन्यथा त्वचा रूखी

हो सकती है। शक्कर के दाने बहुत खुरदरे नहीं होने चाहिये। बहुत हल्के हाथ से मालिश होनी चहिये।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा में कुछ बूँद पानी की डालकर पेस्ट बना लें। इससे सिर्फ ब्लैक हेड वाली जगह पर हल्के हाथ से मालिश करें। अब गुनगुने पानी से

धो लें। इससे ब्लैक हेड मिट जाते है और स्किन में ग्लो आ जाता है। बेकिंग सोडा को दही में मिलाकर पूरे चेहरे पर भी लगाया जा सकता है।

इसके लिए एक चम्मच दही में चौथाई चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर चेहरे पर लगा लें। दस मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे चेहरे पर

एक अलग ही ग्लो आ जाता है तथा ब्लैक हेड से मुक्ति मिलती है।

पसीना

पसीना आने से फायदा है और इससे नुकसान भी हो सकता है। पसीना आने से रोम छिद्र की सफाई हो जाती है लेकिन यदि पानी से धोकर

सफाई नहीं की जाये तो पसीना जम कर नुकसान पैदा कर सकता है। अतः पसीना आने के तुरंत बाद चेहरे को धोना ब्लैक हेड मिटाने में मदद

गार हो सकता है।

ब्लैक हेड स्ट्रिप्स

बाजार में मिलने वाली ब्लैक हेड स्ट्रिप कपड़े पर चिपकने वाला पदार्थ लगा कर बनाई गई होती है। जब इसे त्वचा पर लगा कर उतारते है तो

साथ में ब्लैक हेड इससे चिपक कर बाहर आ जाते है। इससे ब्लैक हेड होना नहीं मिटते, सिर्फ जो हो गए है उन्हें खींचकर बाहर निकालने का

यह एक जरिया है। इन बाजार में मिलने वाली ब्लैक हेड स्ट्रिप की जगह घर पर ही इसके कई विकल्प मिल सकते है।
होंठ फटने से सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नष्ट नहीं होती है बल्कि खाने पीने में और बातचीत करने में भी परेशानी होने लगती है। ज्यादातर सर्दी

के मौसम में यह परेशानी बढ़ जाती है। बार बार जीभ से होंठ गीला करने की इच्छा होती है पर ऐसा करने से कुछ मिनटों के लिए ठीक लगता

है फिर परेशानी होने लगती है। होंठ फटने के कई कारण हो सकते है। कुछ सामान्य कारण ( Hoth fatne ke ) इस प्रकार है:



होठ चाटना, चबाना या काटना


होठ जब भी थोड़े सूखे महसूस होते है तो उन्हें चाट कर गीला करने की इच्छा होने लगती है। होठों पर जीभ फिराने के कुछ मिनट बाद ही

वापस होठ सूखे महसूस होने लगते है। फिर उन्हें नम करने की इच्छा होती है। फिर से ऐसा करना पड़ता है और यह लगातार चलता रहता है।

परंतु इससे समस्या कम नहीं होती बल्कि ज्यादा बढ़ जाती है। इससे होठ ज्यादा सूखने लगते है।.
होठो पर एक सूखी परत सी बन जाती है। इस परत को कुछ लोग दांत से काट कर निकलने की कोशिश करने लगते है। कुछ लोगों की

आदत होती है वे बार बार होठो को दांतों से हल्का हल्का चबाते रहते है। ये सभी हरकतें होठो के लिए नुकसान देह होती है।

होंठ के ऊपर जीभ फिराने से लार की एक परत बन जाती है। लार में एमिलेज़ और माल्टीज़ नामक पाचक एंजाइम होते है।
ये एंजाइम होठो की पतली और नाजुक परत को नुकसान पहुंचाते है। जहाँ सामान्य त्वचा sixteen परतों से बनी होती है वहीं होंठ की त्वचा में

सिर्फ four -5 परत ही होती है। होठों की परत के पतली होने के कारण ही होठो का रंग गुलाबी दिखाई देता है जो असल में नीचे की परत में

मौजूद रक्त से भरी केशिकाओं के कारण दिखाई देता है। लार में मौजूद बेक्टिरिया जो वैसे तो नुकसानदेह नहीं होते लेकिन ये होठों को

नाजुक और पतली परत के कारण नुकसान पहुंचा सकते है । अतः यदि होंठ चबाने, चाटने या काटने की बुरी आदत हो तो इसे तुरंत छोड़

देना चाहिए।

होठो का बचाव नहीं करना

होठो का तेज हवा से और धूप से बचाव बहुत जरुरी होता है। कई बार चेहरे पर तो सनस्क्रीन या लोशन आदि लगा लिए जाते है, लेकिन होठों

पर कुछ नहीं लगाया जाता। होठों पर ना तो सिबेशस ग्रंथियां होती है, और ना ही हेयर फॉलीकल होते है । इस वजह से सामान्य त्वचा की

तरह इनको नमी नहीं मिल पाती। इसके अलावा होठो की त्वचा में दूसरी त्वचा की तरह मेलेनिन भी नहीं होता, जिस पर त्वचा का रंग निर्भर

करता है। मेलेनिन त्वचा को धूप की हानिकारक अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से बचाता है। होठों पर मेलेनिन नहीं होने के कारण यहाँ की त्वचा के

अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से नुकसान की अधिक संभावना होती है। अतः जरुरत के अनुसार होठों का बचाव किया जाना जरुरी होता है।
रूखी ( Dried out ) हवा में इसका ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दी में मौसम में हवा रूखी ( Dried out ) होने के कारण होठ ज्यादा फटते है। कमरे में

चलने वाले हीटर से भी हवा रूखी हो जाती है जो होंठ फटने का कारण बन सकता है। ऐसे में बचाव नहीं किये जाने से होठ फट जाते है।

अतः लिप बाम, वैसलीन, सरसों के तेल, मलाई, घी आदि का उपयोग होठो पर लगाने के लिए करना चाहिए। इससे होठ मुलायम बने रहते

है, फटते नहीं है।

मुंह से साँस लेना

मुंह से साँस लेना कभी मजबूरी होती है तो कभी आदत। जुकाम लगने पर नाक बंद हो जाती है ऐसे में मुंह से सांस लेने में आती है। छोटे बच्चों

के साथ अक्सर ऐसा होता है। इसके अलावा जो लोग खर्राटे ज्यादा लेते है उनका मुंह खुला रहता है और वे साँस मुंह से लेते है । बार बार साँस

की हवा का होठो पर से गुजरना होठो की नमी छीन लेता है और होठ सूख कर फटने लगते है। इसलिए ज्यादा खर्राटे लेने वाले लोगों के होठ

सूखे हुए रहते है। अतः ऐसी समस्याओं का इलाज जल्द कर लेना चाहिए। कभी कभी मुंह से साँस लेने की आदत सी हो जाती है इसे तुरंत छोड़ना चाहिए।
कुछ विशेष तत्व


टूथपेस्ट में ऐसे तत्व हो सकते है जो होठो में सूखापन ला सकते है। यदि आपको ऐसा महसूस हो तो टूथपेस्ट बदल लेना चाहिए। इसके अलावा

और भी कोई उत्पाद ऐसा हो जिसे काम में लेने पर होठों में सूखापन लगे तो उसे बदलना चाहिए। खट्टे फल का एसिड होठो को सुखा सकता

है। टमाटर की सॉस, च्युइंग गम, कैंडी आदि में इस्तेमाल होने वाले सिनेमेट्स भी ऐसे तत्व हो सकते है जो होठों के सूखेपन के लिए जिम्मेदार

हो सकते है।

पानी की कमी

यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो इसका असर होठों पर तुरंत नजर आता है। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर होंठ सुख जाते है। ऐसे

में हवा से या धूप से होठों का सूखापन और बढ़ सकता है। गर्मी के मौसम में पानी कम पीने के कारण होठ सूख कर फट सकते है। अतः पानी

पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।



विटामिन बी व आयरन की कमी


विटामिन बी की कमी के कारण होठ सूखने की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा होठ फटने का कारण आयरन या फोलेट की

कमी भी हो सकता है। रक्त की जाँच से कमी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेने पर ये ठीक हो सकते है। अक्सर होठो के

किनारे फटने का कारण आयरन की कमी होता है जिसका अंदाज नहीं लग पाता, इसलिए रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा अवश्य चेक

करवा लेनी चाहिए।

एलर्जी

कभी कभी मल्टी विटामिन के कुछ तत्व की एलर्जी के कारण होंठ सूखने की परेशानी पैदा हो सकती है। लिपस्टिक के कुछ तत्व एलर्जी पैदा

कर सकते है। इसी तरह खाने पीने के किसी विशेष वस्तु से या खाने में डाले जाने वाले रंग से एलर्जी के कारण होंठ सूख सकते है। ऐसे में

इनका प्रयोग नहीं करना ही उचित होता है। यदि समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बीमारी और दवाएं

थायराइड, सिरोसिस, डायबिटीज आदि बीमारियों के होने से होंठ फटने की समस्या हो सकती है। कुछ अन्य बीमारी के कारण भी होंठ

फटना या उनमे जलन सूजन आदि हो सकते है। कभी कभी कुछ दवाएं जैसे झुर्रियों या एक्ने, ब्लड प्रेशर आदि की दवा के कारण भी होंठ

सूख कर फटने लगते है । यदि लंबे समय तक इस प्रकार की परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए।

होंठ के किनारे फटना या चिरना

होठो का किनारे ( जहाँ दोनों होंठ जुड़ते है ) की तरफ से कटना, किनारे से चिरना या होठों के किनारे पर सूजन या जलन आदि होना फंगल

इन्फेक्शन या बेक्टिरिया आदि के कारण हो सकता है। ये बेक्टिरिया या फंगस लार में मौजूद होते है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यदि मजबूत

होती है तो इनसे कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने तथा मुंह पर चोट या खरोंच आने से या ज्यादा लार या थूक

किनारे पर इकठ्ठा होने से ये बेक्टिरिया तेजी से बढ़ने लगते है । इस वजह से वहाँ संक्रमण दिखाई देता है। प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का

कारण बीमारी या तनाव की स्थिति हो सकती है।
इसके अलावा होठों पर बेक्टिरिया के संक्रमण होने के और भी कई कारण हो सकते है जैसे गंदे हाथ होठों पर फेरना, पेन पेंसिल या नाख़ून

चबाना, खाना खाते समय या सोते समय ज्यादा लार निकलना। होठों पर ख़राब गुणवत्ता के बाम, लिपस्टिक, लिप ग्लॉस आदि लगाना।

खून की कमी होने पर भी होठों के किनारे फटने लगते है, रक्त की जाँच करवाने से इसका पता चलता है।



फटे होंठ के कारण जलन सूजन आदि हो सकते है। यदि होंठ लंबे समय तक फटे रहें या किनारों पर जलन सूजन या बहुत अधिक दर्द या

एलर्जी जैसा दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या चुम्बन होंठ फटने का कारण हो सकता है

मुंह में मौजूद नुकसान नहीं करने वाले बेक्टिरिया भी होठों को नुकसान पहुंचा सकते है । लार में मौजूद पाचक एंजाइम जैसे एमिलेज़ और

माल्टीज़ होठों की पतली परत को ख़राब करते है। जब भी होंठो पर लार की परत बनती है, होठो को नुकसान होता है। चुम्बन ( hug ) के

समय होठों पर लार की परत बनती ही है। कुछ माता पिता छोटे बच्चों को प्यार जताने के लिए उन्हें होठो पर चुंबन देते है। इससे नुकसान हो

सकता है। चुम्बन से पहले अक्सर होठों पर जीभ फेरकर उन्हें नम बनाया जाता है। छोटे से चुम्बन के समय भी लार होंठ पर आ ही जाती है।

और पुरुष महिला के आवेशपूर्ण कामुक चुम्बन के समय तो होंठ लार से भर जाते है। इससे बहुत नुकसान हो सकता है।

हालाँकि कुछ विशेषज्ञ चुम्बन के अनेक फायदे भी बताते है।

होंठ फटने पर घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe With regard to Mouth

— सुबह तथा रात को सोते समय नाभि को साफ करके उसमे गुनगुना सरसों का तेल लगाने से होंठ मुलायम होते है और फटने बंद हो

जाते है।

— सर्दी के कारण फटे होंठ ठीक करने के लिए दूध की मलाई में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम हल्के हाथ से थोड़ी मालिश

होठो का फटना मिट जाता है।

— बादाम का तेल रोजाना सुबह शाम होठो पर लगाने से होंठ फटना ठीक होता है।

— होंठ काले और सूखे हो गए हों तो गुलाब के फूल की ताजा पत्तियां पीस कर इसमें ग्लिसरीन मिला लें। लिपस्टिक का उपयोग बंद करके

इसे नियमित रूप से होठो पर लगाने से होंठ सुन्दर गुलाबी हो जाते है।

— छाछ से निकले मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ गुलाबी और मुलायम होते है।

— घी में जरा सा नमक मिलाकर सुबह शाम होठो पर और नाभि में लगाने से होंठ फटना बंद होता है।

— सरसो के तेल में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम होठों पर और नाभि में लगाने से होंठ फटने बंद होते है।.

स्किन पर झुर्रियां, बचने के उपाय कोलेजन वाले आहार

स्किन पर झुर्रियां होने से उम्र झलकने लगती है। सभी चाहते है की उनकी स्किन जवां और सुन्दर बनी रहे और झुर्रियां आदि न पड़े। इसके

लिए कई तरह के प्रयास किये जाते हैं। बाहर से स्किन को उबटन या मेकअप आदि की मदद से निखारा जा सकता है, लेकिन अंदर से त्वचा

स्वस्थ ना हो तो कितना भी अच्छा मेकअप आदि हो, संतुष्टि नहीं मिलती है और ना ही खूबसूरती नजर आती है।

स्किन पर झुर्रियां पड़ने के कारण

स्किन पर झुर्रियां पड़ने के कुछ बाहरी कारण हो सकते हैं और कुछ अंदरूनी कारण हो सकते है। बाहरी कारण में टेंशन, गलत प्रकार का

रहन सहन, गलत प्रकार का खान पान, फ़ास्ट फ़ूड, चाय, कॉफी, शराब, धूम्रपान, प्रदुषण, शारीरिक गतिविधि का अभाव आदि हो सकते

है। इनके कारण त्वचा में झुर्रियां वक्त से पहले पड़ना शुरू हो सकती है।

अंदरूनी कारण में पोष्टिक भोजन नहीं लेना मुख्य कारण होता है। इसकी वजह से कोलेजन नामक प्रोटीन की कमी हो सकती है। कोलेजन

की कमी होने से झुर्रिया पड़ जाती हैं।.
हमारी त्वचा का स्वस्थ रहना और झुर्रियों, लकीरों, दाग धब्बे से बचे रहना तथा जवां बने रहना हमारे द्वारा लिए गए पोषक तत्वों से बहुत

प्रभावित होता है । पोष्टिक भोजन से मिलने वाले तत्वों की मदद से शरीर में कोलेजन नामक तत्व का निर्माण होता है। कोलेजन बहुत

महत्त्वपूर्ण प्रोटीन होते है जो त्वचा की मजबूती के लिए, कोमलता के लिए तथा नए स्किन सेल्स बनते रहने के लिए आवश्यक होते है।

इनके प्रभाव से त्वचा खूबसूरत नजर आती है। कोलेजन की भूमिका शरीर की अन्य कार्यविधि के लिए भी महत्त्वपूर्ण होती है।



उम्र के साथ कोलेजन का बनना कम हो जाता है। इस वजह से स्किन में झुर्रियां और लकीरें दिखने लगती हैं । पर्याप्त मात्रा में विटामिन

तथा खनिज लवण से युक्त आहार लेने से कोलेजन बनना कम होने से रोका जा सकता है। कुछ फल, सब्जी और मेवों से मिलने वाले विटामिन

व खनिज कोलेजन के बनने में सहायक होते है। इनका नियमित उपयोग करने से कोलेजन की कमी नहीं होती और त्वचा सुन्दर बनी रहती है।

झुर्रियों से बचने का उपाय

स्किन पर झुर्रियां होने से बचाने के लिए क्या खाना चाहिए यह सवाल सभी के मन में होता है। रोजाना के उपयोग की जाने वाली चीजों से ही

पोष्टिक तत्व आसानी से मिल सकते है। इनमे से कुछ आहार इस प्रकार हैं:
पत्ता गोभी – Cabbage.
कोलेजन के लिए पत्ता गोभी एक जाना माना नाम है। पत्ता गोभी में बहुत से लाभदायक तत्व होते हैं।
इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और फीटोन्यूट्रिएंट्स जैसे ल्यूटेनीन आदि तत्व फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाते है तथा त्वचा

को मुलायम और स्निग्ध बनाये रखते हैं। इसमें विटामिन The, W, D और At the मिलते हैं। पत्ता गोभी में फायबर, विटामिन W 6, फोलेट, मेंगेनीज,

आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम आदि होने के कारण इसके उपयोग से कोलेजन का निर्माण बढ़ता है। जो पूरे शरीर में काम

आता है।.

सोया उत्पाद

सोयाबीन से बनने वाले सोया दूध और सोया चीज़ झुर्रियां व लकीरें मिटाने तथा स्किन में ग्लो लाने में कारगर साबित होते हैं। इसमें मौजूद

जेनिस्टीन नामक हार्मोन कोलेजन के निर्माण में सहायक होते है जो स्किन को लचीला, मजबूत और चमकदार बनाते है। सोयाबीन में मौजूद

एंटीऑक्सीडेंट करिश्माई तरीके से त्वचा को निखारते है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल को रोककर कोशिकाओं को नष्ट होने से

बचाते हैं। सोया से बने आहार लेने से त्वचा में कसावट आती है। स्किन जवां दिखती है।
लाल रंग के फल और सब्जियां


लाल या गुलाबी रंग के फल जैसे सेब, अनार, गुलाबी अंगूर, तरबूज, चेरी, स्ट्राबेरी तथा लाल रंग की सब्जियां जैसे टमाटर, गाजर, चुकन्दर

, लाल मिर्च, लाल पत्ता गोभी, प्याज आदि कोलेजन के निर्माण में सहायक होकर उम्र के प्रभाव को कम करते हैं।

इनमे पाए जाने वाले लाइकोपीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट कोलेजन का निर्माण बढ़ाते हैं तथा सेल्स की गतिविधि सुधारते हैं। इसके प्रभाव से धूप से

होने वाले नुकसान भी कम होते हैं। इससे स्किन की सुंदरता बढ़ती है और स्किन झुर्रियों से मुक्त होती है।

फलियां

सब्जी के रूप में कई प्रकार की फलियां मिलती हैं जैसे सेम फली, ग्वार फली, बाकला फली, बालोड़, फ्रेंच बीन्स आदि। फलियों में कई

प्रकार के तत्व होते है जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद गार साबित होते है। फलियों से मिलने वाले जिंक तथा हायालुरोनिक एसिड ऐसे तत्व

होते है जो स्किन में नमी बनाये रखते है। इसके कारण स्किन में रुखापन नहीं आता। त्वचा में नमी बनी रहने के कारण झुर्रियों तथा लकीरों

से बचाव होता है।

गाजर

गाजर में विटामिन The प्रचुर मात्रा में होता है जो कोलेजन को नष्ट होने से बचाता है। विटामिन The स्किन को मजबूत करता है तथा स्किन की सतह

पर रक्त पहुँचाने में सहायक होता है। इससे त्वचा को पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते है और स्किन हेल्थी रहती है। गाजर से मिलने वाले

पोषक तत्वों से मेलेनिन कम होता है जिसके कारण यह स्किन को गोरा बनाये रखने में सहायक होते हैं। यह सीबम को कम करके स्किन को

पिम्पल्स आदि से बचाती है। गाजर के अन्य फायदे जानने के लिए यहाँ क्लीक करें।



अलसी के बीज और अखरोट


अलसी के बीज तथा अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड होते है जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक होते है। इन्हें शरीर खुद बनाने में असमर्थ होता

है। इन्हें भोजन द्वारा ही प्राप्त करना पड़ता है। इनकी मदद से ह्रदय तथा दिमाग की कार्यविधि सही तरीके से चलती है। त्वचा के स्वस्थ रहने के

लिए भी ओमेगा 3 फैटी एसिड उतने ही जरुरी होते है। ये त्वचा को सूरज की रौशनी से होने वाले नुकसान से बचाते है।

नींबू संतरा आदि सिट्रस फल

फलों का उपयोग लाभदायक होता है यह तो सभी जानते है लेकिन विटामिन D जिन फलों में ज्यादा होता है वे फल त्वचा के लिए अधिक

फायदेमंद होते है। नींबू, संतरा, किन्नू, मोसंबी आदि सिट्रस फल विटामिन D के अच्छे स्रोत होने के कारण स्किन को बहुत फायदा पहुंचाते

है। इनके अलावा अंगूर, पपीता तथा अमरुद जैसे फल जिनमे विटामिन D प्रचुर मात्रा में होता है, स्किन को निखारने के लिए जरूर खाने

चाहिए। आंवला भी विटामिन D का भंडार होने के कारण त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। विटामिन D एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट

है प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है तथा त्वचा को कैंसर जैसे गंभीर रोग से भी बचाता है। इनसे सनबर्न के कारण काली पड़ी त्वचा भी प्राकृतिक

रूप से दमक उठती है।

लहसुन

लहसुन में सल्फर, लिपोइक एसिड, टॉरीन नामक विशेष तत्व उम्र के प्रभाव से नष्ट हुए कोलेजन फायबर को फिर से दुरुस्त कर देते हैं।

इसके कारण त्वचा पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। किसी भी रूप में लहसुन का उपयोग जरूर करना चाहिए,

लहसुन की चटनी बनाकर खाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।.

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