दांत में कीड़ा लगना एक आम समस्या है। इसके बारे में सभी जानते है। रोज नियम से ब्रश
भी करते है। फिर भी दांत में कीड़ा लग जाता है।
जिसका पता ही नहीं चलता और एक दिन दांत में तेज दर्द के कारण परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा
सकता है। आइये देखें।
दांत में कीड़ा दांत पर जमा होने वाले मैल की परत (Plaque ) के कारण लगता है। और ये कोई कीड़ा नहीं होता। ये दाँतों की सही तरीके से
सफाई नहीं होने की वजह से दाँत को हुआ नुकसान है। जिसके कारण दांत की ऊपरी मजबूत परत ( Teeth enamel ) नष्ट हो जाती है। और दाँत
अंदर तक ख़राब हो जाता है। मैल की परत (Plaque) बनने के चार मुख्य कारण होते है:
— बैक्टीरिया
— लार
— एसिड.
— भोजन के कण
हम सभी के मुँह में बैक्टीरिया होते है। हमारे खाने पीने के सामान में यदि किसी भी रूप में शक्कर है। तो मुँह में रहने वाले बैक्टीरिया
तुरंत शक्कर को एसिड में बदलना शुरू कर देते है। भोजन के कण भी एसिड में बदल जाते है। दाँत का मजबूत इनेमल इस एसिड से दांत
की रक्षा करता है। किन्तु यदि किसी कारण से दांत का ये इनेमल कमजोर पड़ जाता है तो एसिड धीरे धीरे दांत को अंदर तक खोखला कर
देता है। ऊपर से सिर्फ छोटा सा काला बिंदु दिखाई देता है। लेकिन हो सकता है की अंदर से दांत ज्यादा नष्ट हो चूका हो।
दाँत में कीड़ा लगने के कारण – Factors associated with Hole
Dant me personally kide ka karan
दाँत का इनेमल कमजोर पड़ने के कई कारण हो सकते है। इनेमल के कमजोर पड़ने से कीड़ा किसी को भी लग सकता है। छोटे बच्चे जिनके
जिनके दूध के दाँत होते है उन्हें भी ये समस्या हो सकती है। सचेत रहकर नियमित रूप से दाँत चेक करने चाहिए। यदि काला बिंदु दिखाई दे
तो सतर्क हो जाना चाहिए। कुछ लोगों में दाँत में कीड़ा लगने या कैविटी बनने की सम्भावना बहुत अधिक होती है।.
जिसका पता ही नहीं चलता और एक दिन दांत में तेज दर्द के कारण परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा
सकता है। आइये देखें।
दांत में कीड़ा दांत पर जमा होने वाले मैल की परत (Plaque ) के कारण लगता है। और ये कोई कीड़ा नहीं होता। ये दाँतों की सही तरीके से
सफाई नहीं होने की वजह से दाँत को हुआ नुकसान है। जिसके कारण दांत की ऊपरी मजबूत परत ( Teeth enamel ) नष्ट हो जाती है। और दाँत
अंदर तक ख़राब हो जाता है। मैल की परत (Plaque) बनने के चार मुख्य कारण होते है:
— बैक्टीरिया
— लार
— एसिड.
— भोजन के कण
हम सभी के मुँह में बैक्टीरिया होते है। हमारे खाने पीने के सामान में यदि किसी भी रूप में शक्कर है। तो मुँह में रहने वाले बैक्टीरिया
तुरंत शक्कर को एसिड में बदलना शुरू कर देते है। भोजन के कण भी एसिड में बदल जाते है। दाँत का मजबूत इनेमल इस एसिड से दांत
की रक्षा करता है। किन्तु यदि किसी कारण से दांत का ये इनेमल कमजोर पड़ जाता है तो एसिड धीरे धीरे दांत को अंदर तक खोखला कर
देता है। ऊपर से सिर्फ छोटा सा काला बिंदु दिखाई देता है। लेकिन हो सकता है की अंदर से दांत ज्यादा नष्ट हो चूका हो।
दाँत में कीड़ा लगने के कारण – Factors associated with Hole
Dant me personally kide ka karan
दाँत का इनेमल कमजोर पड़ने के कई कारण हो सकते है। इनेमल के कमजोर पड़ने से कीड़ा किसी को भी लग सकता है। छोटे बच्चे जिनके
जिनके दूध के दाँत होते है उन्हें भी ये समस्या हो सकती है। सचेत रहकर नियमित रूप से दाँत चेक करने चाहिए। यदि काला बिंदु दिखाई दे
तो सतर्क हो जाना चाहिए। कुछ लोगों में दाँत में कीड़ा लगने या कैविटी बनने की सम्भावना बहुत अधिक होती है।.
शुरू में दाँत में बहुत छोटा छेद बनता है। इस समय किसी प्रकार का दर्द या परेशानी नहीं होती। लेकिन ये दाँत के नष्ट होने की शुरुआत है।
इसलिए तुरन्त इसका इलाज होना चाहिए ताकि तेज दाँत के दर्द की परेशानी से बचा जा सके। ये छोटा सा छेद ही दांतों की जड़ों तक पहुँच
कर तेज दर्द पैदा करता है। यदि इस स्थिति में भी इलाज ना हो तो इन्फेक्शन बढ़ कर खून में भी फ़ैल सकता है , पस पैदा हो सकता है।
परिस्थिति गम्भीर हो जाती है।
दांत में दर्द होने पर कुछ घरेलु नुस्खे अपनाने से आराम मिलता है। इन घरेलु नुस्खों को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।
दाँत में कीड़ा लगने से बचने के 4 उपाय – Care of Teeth
कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल अक्षर से लिखे शब्द पर क्लिक करके उस शब्द के बारे में विस्तार से जानिये।
दाँतो में कीड़ा ना लगे इसका ध्यान रखकर इस परेशानी से बच सकते है। ये 4 उपाय अपना कर दाँत में कीड़ा लगने से बचे रह सकते है ।
— पौष्टिक खुराक लें। विशेषकर जिसमे कैल्शियम , मैग्नीशियम , विटामिन “D “, आदि पर्याप्त मात्रा में हो।
जैसे – दूध , पनीर , बादाम , तिल , दही , पत्तेदार सब्जियाँ , गाजर , सेब , दालें , संतरा , टोफू , साबुत या मोटा अनाज इत्यादि।
— मिठाई ,चॉकलेट आदि मीठे और एसिड वाली खाने पीने की चीजों का उपयोग कम करें। खासकर बाजार में मिलने वाला सॉफ्ट ड्रिंक
दांतों के इनेमल के लिए बहुत नुकसान देह होता है क्योकि इसमें फॉस्फोरिक एसिड और सिट्रिक एसिड होता है। दाँतों पर चिपकने वाली
चीजें खाने से बचें। यदि ऐसा कुछ खाया पिया है तो या तो ब्रश कर लें या अच्छे से कुल्ले करके दाँतों की सफाई कर लें ।
— दाँतो की सफाई सही तरीके से करें। संभव हो तो डेंटिस्ट से सही तरीके से ब्रश करना सीख लें। हम बचपन से ब्रश करते आये है फिर
भी कीड़ा लगने का अर्थ यही है की ब्रश सही तरीके से नहीं हो रहा है। रात को ब्रश जरूर करना चाहिए। ये सुबह किये जाने वाले ब्रश से भी
ज्यादा अच्छा है।
— पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ। इससे लार पर्याप्त मात्रा में बनती है जो दाँतो की सुरक्षा करती है। मसूड़े गीले रहते है जिससे उन पर भोजन
नहीं चिपकता। शरीर से वे विषैले तत्व बाहर निकलते है जिनसे दांतों को नुकसान होता है।
दाँत के कीड़े का इलाज – Tratment of Cavity
RCT kya hota he
कीड़ा लगने पर इसका इलाज समस्या की गम्भीरता पर निर्भर होता है। डेंटिस्ट को एक्स-रे करके भी देखना पड़ सकता है की दाँत अंदर से
कितना खोखला हो चूका है। डेंटिस्ट दाँत के ख़राब हुए काले हिस्से को छोटी ड्रिल मशीन से साफ करके उसमे चांदी या रेसिन भर देता है
ताकि दाँत अधिक ख़राब ना हो। इसे दाँत की फिलिंग करना कहते है।
यदि जड़ों तक दाँत ख़राब हो चुका है तो डेंटिस्ट रुट केनाल ट्रीटमेंट करता है जिसे आरसीटी (RCT ) कहते है। इसमें जड़ तक ड्रिल से सफाई
करके रेसिन भर दिया जाता है। इसके बाद ऊपर कैप लगाई जाती है। ये कैप एक मजबूत खोल होता है जो असली दाँत जैसा दिखता है। इसके
लगाने से आरसीटी किये हुए दाँत का बचाव होता है। ये कैप जरूर लगवानी चाहिए अन्यथा दांत को अधिक नुकसान हो सकता है।
यदि किसी एक दाँत में कैविटी है तो यह पास वाले दाँत में भी लग सकती है और दूसरा दाँत भी ख़राब हो सकता है। इसलिए तुरंत कैविटी का
इलाज करवा लेना चाहिए।

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